एको रागिषु राजते प्रियतमादेहार्धहारी हरो
नीरागेषु जनो विमुक्तललनासङ्गो न यस्मात्परः ।
दुर्वारस्मरबाणपन्नगविषव्याबिद्धमुग्धो जनः
शेषः कामविडम्बितान्न विषयान्भोक्तुं न मोक्तुं क्षमः ॥
एको रागिषु राजते प्रियतमादेहार्धहारी हरो
नीरागेषु जनो विमुक्तललनासङ्गो न यस्मात्परः ।
दुर्वारस्मरबाणपन्नगविषव्याबिद्धमुग्धो जनः
शेषः कामविडम्बितान्न विषयान्भोक्तुं न मोक्तुं क्षमः ॥
नीरागेषु जनो विमुक्तललनासङ्गो न यस्मात्परः ।
दुर्वारस्मरबाणपन्नगविषव्याबिद्धमुग्धो जनः
शेषः कामविडम्बितान्न विषयान्भोक्तुं न मोक्तुं क्षमः ॥
अन्वयः
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रागिषु प्रियतमा-देह-अर्ध-हारी एकः हरः राजते । नीरागेषु (च) यस्मात् परः जनः न (अस्ति सः) विमुक्त-ललना-सङ्गः (योगी राजते) । शेषः जनः दुर्वार-स्मर-बाण-पन्नग-विष-व्याबिद्ध-मुग्धः (सन्) काम-विडम्बितान् विषयान् न भोक्तुम् न मोक्तुम् क्षमः (अस्ति) ।
Summary
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Among the passionate, only Lord Shiva, who carries half the body of his beloved, shines. Among the dispassionate, the sage who is free from female company, than whom there is no one greater, shines. The rest of humanity, bewildered and struck by the irresistible serpent-like poison of Kama's arrows, is tormented by desire, unable to either enjoy or renounce worldly pleasures.
सारांश
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संसार में केवल शिव ही श्रेष्ठ हैं जो पूर्ण विरक्त भी हैं और अर्धनारीश्वर भी। शेष लोग तो कामदेव के वशीभूत होकर विषयों में उलझे हुए हैं।
पदच्छेदः
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| एकः | एक (१.१) | one |
| रागिषु | रागिन् (७.३) | Among the passionate |
| राजते | राजते (√राज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shines |
| प्रियतमा-देह-अर्ध-हारी | प्रियतमा–देह–अर्ध–हारिन् (√हृ+णिनि, १.१) | who carries half the body of his beloved |
| हरः | हर (१.१) | Shiva |
| नीरागेषु | नीराग (७.३) | Among the dispassionate |
| जनः | जन (१.१) | the person |
| विमुक्त-ललना-सङ्गः | विमुक्त–ललना–सङ्ग (१.१) | who is free from the company of women |
| न | न | not |
| यस्मात् | यद् (५.१) | than whom |
| परः | पर (१.१) | greater |
| दुर्वार-स्मर-बाण-पन्नग-विष-व्याबिद्ध-मुग्धः | दुर्वार–स्मर–बाण–पन्नग–विष–व्याबिद्ध (वि+आ√व्यध्+क्त)–मुग्ध (१.१) | bewildered and struck by the irresistible serpent-like poison of Kama's arrows |
| जनः | जन (१.१) | person |
| शेषः | शेष (१.१) | The rest |
| काम-विडम्बितान् | काम–विडम्बित (२.३) | tormented by desire |
| न | न | neither |
| विषयान् | विषय (२.३) | worldly pleasures |
| भोक्तुम् | भोक्तुम् (√भुज्+तुमुन्) | to enjoy |
| न | न | nor |
| मोक्तुम् | मोक्तुम् (√मुच्+तुमुन्) | to renounce |
| क्षमः | क्षम (१.१) | is able |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | को | रा | गि | षु | रा | ज | ते | प्रि | य | त | मा | दे | हा | र्ध | हा | री | ह | रो |
| नी | रा | गे | षु | ज | नो | वि | मु | क्त | ल | ल | ना | स | ङ्गो | न | य | स्मा | त्प | रः |
| दु | र्वा | र | स्म | र | बा | ण | प | न्न | ग | वि | ष | व्या | बि | द्ध | मु | ग्धो | ज | नः |
| शे | षः | का | म | वि | ड | म्बि | ता | न्न | वि | ष | या | न्भो | क्तुं | न | मो | क्तुं | क्ष | मः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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