धैर्यं यस्य पिता क्षमा च जननी शान्तिश्चिरं गेहिनी
सत्यं मित्रमिदं दया च भगिनी भ्राता मनःसंयमः ।
शय्या भूमितलं दिशोऽपि वसनं ज्ञानामृतं भोजनं
ह्येते यस्य कुटुम्बिनो वद सखे कस्माद्भयं योगिनः ॥
धैर्यं यस्य पिता क्षमा च जननी शान्तिश्चिरं गेहिनी
सत्यं मित्रमिदं दया च भगिनी भ्राता मनःसंयमः ।
शय्या भूमितलं दिशोऽपि वसनं ज्ञानामृतं भोजनं
ह्येते यस्य कुटुम्बिनो वद सखे कस्माद्भयं योगिनः ॥
सत्यं मित्रमिदं दया च भगिनी भ्राता मनःसंयमः ।
शय्या भूमितलं दिशोऽपि वसनं ज्ञानामृतं भोजनं
ह्येते यस्य कुटुम्बिनो वद सखे कस्माद्भयं योगिनः ॥
सारांश
AI
धैर्य जिसके पिता, क्षमा माता, शांति पत्नी, सत्य मित्र, दया बहन और मन का संयम भाई है; पृथ्वी जिसकी शय्या, दिशाएं वस्त्र और ज्ञान ही भोजन है, उस योगी को भला किसी का भय कैसे हो सकता है? उसका परिवार तो दिव्य गुणों से बना है।
पदच्छेदः
| धैर्यं | धैर्य (१.१) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| पिता | पितृ (१.१) |
| क्षमा | क्षमा (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| जननी | जननी (१.१) |
| शान्तिश् | शान्ति (१.१) |
| चिरं | चिरम् (अव्ययः) |
| गेहिनी | गेहिनी (१.१) |
| सत्यं | सत्य (१.१) |
| मित्रम् | मित्र (१.१) |
| इदं | इदम् (१.१) |
| दया | दया (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| भगिनी | भगिनी (१.१) |
| भ्राता | भ्रातृ (१.१) |
| मनःसंयमः | मनस्–संयम (१.१) |
| शय्या | शय्या (१.१) |
| भूमितलं | भूमि–तल (१.१) |
| दिशो | दिश् (१.३) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| वसनं | वसन (१.१) |
| ज्ञानामृतं | ज्ञान–अमृत (१.१) |
| भोजनं | भोजन (१.१) |
| ह्येते | हि (अव्ययः)–एतद् (१.३) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| कुटुम्बिनो | कुटुम्बिन् (१.३) |
| वद | वद (√वद् लोट् म.पु. ) |
| सखे | सखि (८.१) |
| कस्माद् | क (५.१) |
| भयं | भय (१.१) |
| योगिनः | योगिन् (६.१) |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धै | र्यं | य | स्य | पि | ता | क्ष | मा | च | ज | न | नी | शा | न्ति | श्चि | रं | गे | हि | नी |
| स | त्यं | मि | त्र | मि | दं | द | या | च | भ | गि | नी | भ्रा | ता | म | नः | सं | य | मः |
| श | य्या | भू | मि | त | लं | दि | शो | ऽपि | व | स | नं | ज्ञा | ना | मृ | तं | भो | ज | नं |
| ह्ये | ते | य | स्य | कु | टु | म्बि | नो | व | द | स | खे | क | स्मा | द्भ | यं | यो | गि | नः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.