चुम्बन्तो गण्डभित्तीरलकवति मुखे सीत्कृतान्यादधाना
वक्षःसूत्कञ्चुकेषु स्तनभरपुलकोद्भेदमापादयन्तः ।
ऊरूनाकम्पयन्तः पृथुजघनतटात्स्रंसयन्त्ॐऽशुकानि
व्यक्तं कान्ताजनानां विटचरितभृतः शैशिरा वान्ति वाताः ॥

अन्वयः AI अलकवति मुखे गण्ड-भित्तीः चुम्बन्तः, सीत्कृतानि आदधानाः, उत्कञ्चुकेषु वक्षःसु स्तन-भर-पुलक-उद्भेदम् आपादयन्तः, ऊरून् आकम्पयन्तः, पृथु-जघन-तटात् अंशुकानि स्रंसयन्तः, कान्ता-जनानां विट-चरित-भृतः शैशिराः वाताः व्यक्तं वान्ति।
Summary AI The winter winds clearly blow like libertines towards beloved women: kissing the expanse of their cheeks on faces with flowing curls, producing shivering sounds, causing goosebumps to appear on their full breasts on chests with bodices removed, making their thighs tremble, and causing their garments to slip from their broad hips.
सारांश AI शिशिर ऋतु की हवाएँ कामुक पुरुषों के समान आचरण कर रही हैं। वे स्त्रियों के कपोलों को चूमती हैं, मुख से सीत्कारी ध्वनियाँ निकलवाती हैं, वक्षस्थल पर रोमांच उत्पन्न करती हैं, जंघाओं को कँपाती हैं और उनके नितम्बों से वस्त्रों को खिसका देती हैं।
पदच्छेदः AI
चुम्बन्तःचुम्बत् (√चुम्ब्+शतृ, १.३) Kissing
गण्डगण्ड cheeks
भित्तीःभित्ति (२.३) the expanse of
अलकवतिअलकवत् (७.१) with curls
मुखेमुख (७.१) on the face
सीत्कृतानिसीत्कृत (२.३) hissing sounds
आदधानाःआदधान (आ√धा+शानच्, १.३) Producing
वक्षःसुवक्षस् (७.३) on the chests
उत्कञ्चुकेषुउत्कञ्चुक (७.३) with bodices removed
स्तनस्तन breasts
भरभर fullness
पुलकपुलक goosebumps
उद्भेदम्उद्भेद (२.१) the appearance of
आपादयन्तःआपादयत् (आ√पद्+णिच्+शतृ, १.३) Causing
ऊरून्ऊरु (२.३) thighs
आकम्पयन्तःआकम्पयत् (आ√कम्प्+णिच्+शतृ, १.३) Making tremble
पृथुपृथु broad
जघनजघन hips
तटात्तट (५.१) from the region of
स्रंसयन्तःस्रंसयत् (√स्रंस्+णिच्+शतृ, १.३) Causing to slip
अंशुकानिअंशुक (२.३) garments
व्यक्तम्व्यक्तम् Clearly
कान्ताकान्ता beloved
जनानाम्जन (६.३) of women
विटविट libertine
चरितचरित behavior
भृतःभृत (√भृ+क्त, १.३) bearing
शैशिराःशैशिर (१.३) Of the cold season
वान्तिवान्ति (√वा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) blow
वाताःवात (१.३) winds
छन्दः स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९ २० २१
चु म्ब न्तो ण्ड भि त्ती ति मु खे सी त्कृ ता न्या धा ना
क्षः सू त्क ञ्चु के षु स्त पु को द्भे मा पा न्तः
रू ना म्प न्तः पृ थु टा त्स्रं न्त्ॐ ऽशु का नि
व्य क्तं का न्ता ना नां वि रि भृ तः शै शि रा वा न्ति वा ताः
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