हेमन्ते दधिदुग्धसर्पिरशना माञ्जिष्ठवासोभृतः
काश्मीरद्रवसान्द्रदिग्धवपुषश्छिन्ना विचित्रै रतैः ।
वृत्तोरुस्तनकामिनोजनकृताश्लेषा गृहाभ्यन्तरे
ताम्बूलीदलपूगपूरितमुखा धन्याः सुखं शेरते ॥
हेमन्ते दधिदुग्धसर्पिरशना माञ्जिष्ठवासोभृतः
काश्मीरद्रवसान्द्रदिग्धवपुषश्छिन्ना विचित्रै रतैः ।
वृत्तोरुस्तनकामिनोजनकृताश्लेषा गृहाभ्यन्तरे
ताम्बूलीदलपूगपूरितमुखा धन्याः सुखं शेरते ॥
काश्मीरद्रवसान्द्रदिग्धवपुषश्छिन्ना विचित्रै रतैः ।
वृत्तोरुस्तनकामिनोजनकृताश्लेषा गृहाभ्यन्तरे
ताम्बूलीदलपूगपूरितमुखा धन्याः सुखं शेरते ॥
अन्वयः
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हेमन्ते दधि-दुग्ध-सर्पिः-अशनाः, माञ्जिष्ठ-वासः-भृतः, काश्मीर-द्रव-सान्द्र-दिग्ध-वपुषः, विचित्रैः रतैः छिन्नाः, वृत्त-ऊरु-स्तन-कामिनी-जन-कृत-आश्लेषाः, ताम्बूली-दल-पूग-पूरित-मुखाः धन्याः गृह-अभ्यन्तरे सुखं शेरते।
Summary
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In winter, fortunate men sleep happily inside their homes. They eat curd, milk, and ghee, wear madder-colored clothes, their bodies are smeared with thick saffron paste, and they are exhausted by various love-sports. They are embraced by loving women with rounded thighs and breasts, and their mouths are filled with betel leaves and areca nuts.
सारांश
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हेमंत ऋतु में जो लोग पुष्टाहार का सेवन करते हैं, केसर और चंदन का लेप लगाते हैं और अपनी स्त्रियों के साथ महलों में सुखपूर्वक विश्राम करते हैं, वे ही वास्तव में भाग्यशाली हैं।
पदच्छेदः
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| हेमन्ते | हेमन्त (७.१) | In the winter |
| दधि | दधि | curd |
| दुग्ध | दुग्ध | milk |
| सर्पिः | सर्पिस् | ghee |
| अशनाः | अशन (१.३) | eating |
| माञ्जिष्ठ | माञ्जिष्ठ | madder-colored |
| वासः | वासस् | clothes |
| भृतः | भृत (√भृ+क्त, १.३) | wearing |
| काश्मीर | काश्मीर | saffron |
| द्रव | द्रव | liquid |
| सान्द्र | सान्द्र | thickly |
| दिग्ध | दिग्ध (√दिह्+क्त) | smeared |
| वपुषः | वपुस् (१.३) | whose bodies |
| छिन्नाः | छिन्न (√छिद्+क्त, १.३) | exhausted |
| विचित्रैः | विचित्र (३.३) | by various |
| रतैः | रत (३.३) | by love-sports |
| वृत्त | वृत्त | rounded |
| ऊरु | ऊरु | thighs |
| स्तन | स्तन | breasts |
| कामिनी | कामिनी | loving women |
| जन | जन | people |
| कृत | कृत (√कृ+क्त) | made |
| आश्लेषाः | आश्लेष (१.३) | embraced |
| गृह | गृह | house |
| अभ्यन्तरे | अभ्यन्तर (७.१) | inside |
| ताम्बूली | ताम्बूली | betel |
| दल | दल | leaves |
| पूग | पूग | areca nuts |
| पूरित | पूरित (√पॄ+क्त) | filled |
| मुखाः | मुख (१.३) | whose mouths |
| धन्याः | धन्य (१.३) | fortunate men |
| सुखम् | सुखम् | Happily |
| शेरते | शेरते (√शी कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they lie/sleep |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हे | म | न्ते | द | धि | दु | ग्ध | स | र्पि | र | श | ना | मा | ञ्जि | ष्ठ | वा | सो | भृ | तः |
| का | श्मी | र | द्र | व | सा | न्द्र | दि | ग्ध | व | पु | ष | श्छि | न्ना | वि | चि | त्रै | र | तैः |
| वृ | त्तो | रु | स्त | न | का | मि | नो | ज | न | कृ | ता | श्ले | षा | गृ | हा | भ्य | न्त | रे |
| ता | म्बू | ली | द | ल | पू | ग | पू | रि | त | मु | खा | ध | न्याः | सु | खं | शे | र | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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