अर्धं सुप्त्वा निशायाः सरभससुरतायाससन्नश्लथाङ्ग-
प्रोद्भूतासह्य तृष्णो मधुमदनिरतो हर्म्यपृष्ठे विविक्ते ।
सम्भोगक्लान्तकान्ताशिथिलभुजलतावर्जितं कर्करीतो
ज्योत्स्नाभिन्नाच्छधारं पिबति न सलिलं शारदं मन्दपुण्यः ॥
अर्धं सुप्त्वा निशायाः सरभससुरतायाससन्नश्लथाङ्ग-
प्रोद्भूतासह्य तृष्णो मधुमदनिरतो हर्म्यपृष्ठे विविक्ते ।
सम्भोगक्लान्तकान्ताशिथिलभुजलतावर्जितं कर्करीतो
ज्योत्स्नाभिन्नाच्छधारं पिबति न सलिलं शारदं मन्दपुण्यः ॥
प्रोद्भूतासह्य तृष्णो मधुमदनिरतो हर्म्यपृष्ठे विविक्ते ।
सम्भोगक्लान्तकान्ताशिथिलभुजलतावर्जितं कर्करीतो
ज्योत्स्नाभिन्नाच्छधारं पिबति न सलिलं शारदं मन्दपुण्यः ॥
अन्वयः
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मन्द-पुण्यः निशायाः अर्धं सुप्त्वा, सरभस-सुरत-आयास-सन्न-श्लथ-अङ्ग-प्रउद्भूत-असह्य-तृष्णः, मधु-मद-निरतः (सन्) विविक्ते हर्म्य-पृष्ठे कर्करीतः सम्भोग-क्लान्त-कान्ता-शिथिल-भुज-लता-वर्जितं ज्योत्स्ना-भिन्न-अच्छ-धारं शारदं सलिलं न पिबति।
Summary
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An unfortunate man, after sleeping for half the night, feels an unbearable thirst from limbs weary from passionate lovemaking. Intoxicated with wine, he does not get to drink, on a secluded palace roof, the clear, moonlit stream of autumnal water poured from a jar held by the limp, creeper-like arm of his beloved, who is tired from their union.
सारांश
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चांदनी रात में महल की छत पर अपनी प्रियतमा के हाथों से शीतल जल पीने का सुख जिसे प्राप्त नहीं होता, वह मंद-पुण्य वाला मनुष्य शरद ऋतु के वास्तविक आनंद से वंचित रह जाता है।
पदच्छेदः
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| अर्धम् | अर्ध (२.१) | Half |
| सुप्त्वा | सुप्त्वा (√स्वप्+क्त्वा) | having slept |
| निशायाः | निशा (६.१) | of the night |
| सरभस | सरभस | passionate |
| सुरत | सुरत | lovemaking |
| आयास | आयास | exertion |
| सन्न | सन्न (√सद्+क्त) | weary |
| श्लथ | श्लथ | languid |
| अङ्ग | अङ्ग | limbs |
| प्रोद्भूत | प्रोद्भूत (प्र+उद्√भू+क्त) | arisen from |
| असह्य | असह्य (√सह्+यत्) | unbearable |
| तृष्णः | तृष्णा (१.१) | whose thirst |
| मधु | मधु | wine |
| मद | मद | intoxication |
| निरतः | निरत (नि√रम्+क्त, १.१) | engaged in |
| हर्म्य | हर्म्य | palace |
| पृष्ठे | पृष्ठ (७.१) | on the roof |
| विविक्ते | विविक्त (७.१) | secluded |
| सम्भोग | सम्भोग | lovemaking |
| क्लान्त | क्लान्त (√क्लम्+क्त) | fatigued |
| कान्ता | कान्ता | beloved's |
| शिथिल | शिथिल | limp |
| भुज | भुज | arm |
| लता | लता | creeper-like |
| वर्जितम् | वर्जित (√वृज्+क्त, २.१) | poured from |
| कर्करीतः | कर्करी (५.१) | from a water-jar |
| ज्योत्स्ना | ज्योत्स्ना | moonlight |
| भिन्न | भिन्न (√भिद्+क्त) | mingled with |
| अच्छ | अच्छ | clear |
| धारम् | धार (२.१) | stream |
| पिबति | पिबति (√पा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | drinks |
| न | न | not |
| सलिलम् | सलिल (२.१) | water |
| शारदम् | शारद (२.१) | of autumn |
| मन्द | मन्द | little |
| पुण्यः | पुण्य (१.१) | a person of merit |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | र्धं | सु | प्त्वा | नि | शा | याः | स | र | भ | स | सु | र | ता | या | स | स | न्न | श्ल | था | ङ्ग |
| प्रो | द्भू | ता | स | ह्य | तृ | ष्णो | म | धु | म | द | नि | र | तो | ह | र्म्य | पृ | ष्ठे | वि | वि | क्ते |
| स | म्भो | ग | क्ला | न्त | का | न्ता | शि | थि | ल | भु | ज | ल | ता | व | र्जि | तं | क | र्क | री | तो |
| ज्यो | त्स्ना | भि | न्ना | च्छ | धा | रं | पि | ब | ति | न | स | लि | लं | शा | र | दं | म | न्द | पु | ण्यः |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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