परिमलभृतो वाताः शाखा नवाङ्कुरकोटयो
मधुरविधुरोत्कण्ठाभाजः प्रिया पिकपक्षिणाम् ।
विरलविरसस्वेदोद्गारा वधूवदनेन्दवः
प्रसरति मधौ धात्र्यां जातो न कस्य गुणोदयः ॥

अन्वयः AI मधौ प्रसरति (सति), धात्र्याम् वाताः परिमल-भृतः (जाताः), शाखाः नव-अङ्कुर-कोटयः (जाताः), पिक-पक्षिणाम् प्रियाः मधुर-विधुर-उत्कण्ठा-भाजः (जाताः), वधू-वदन-इन्दवः विरल-विरस-स्वेद-उद्गाराः (जाताः) । कस्य गुण-उदयः न जातः?
Summary AI When spring spreads on the earth, the winds become fragrant, branches get new sprouts, the beloved calls of cuckoos are filled with sweet, painful longing, and the moon-like faces of young women show sparse beads of perspiration. Whose excellence does not arise?
सारांश AI सुगन्धित पवन, वृक्षों की नई कोपलें, कोयल की मधुर कूक और स्त्रियों के चन्द्रमा के समान सुंदर मुख—जब वसंत ऋतु का प्रसार होता है, तब पृथ्वी पर भला किसका अनुराग और सौंदर्य जागृत नहीं होता?
पदच्छेदः AI
परिमल-भृतःपरिमलभृत (√भृ+क्त, १.३) filled with fragrance
वाताःवात (१.३) the winds
शाखाःशाखा (१.३) branches
नव-अङ्कुर-कोटयःनवअङ्कुरकोटि (१.३) having tips with new sprouts
मधुर-विधुर-उत्कण्ठा-भाजःमधुरविधुरउत्कण्ठाभाज् (१.३) possessing sweet and painful longing
प्रियाःप्रिया (१.३) the beloved (calls)
पिक-पक्षिणाम्पिकपक्षिन् (६.३) of the cuckoo birds
विरल-विरस-स्वेद-उद्गाराःविरलविरसस्वेदउद्गार (१.३) showing sparse beads of perspiration
वधू-वदन-इन्दवःवधूवदनइन्दु (१.३) the moon-like faces of young women
प्रसरतिप्रसरति (प्र√सृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) spreads
मधौमधु (७.१) when spring
धात्र्याम्धात्री (७.१) on the earth
जातःजात (√जन्+क्त, १.१) arisen
not
कस्यकिम् (६.१) whose
गुण-उदयःगुणउदय (१.१) arising of excellence
छन्दः हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
रि भृ तो वा ताः शा खा वा ङ्कु को यो
धु वि धु रो त्क ण्ठा भा जः प्रि या पि क्षि णाम्
वि वि स्वे दो द्गा रा धू ने न्द वः
प्र ति धौ धा त्र्यां जा तो स्य गु णो यः
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