स्त्रीमुद्रां कुसुमायुधस्य जयिनीं सर्वार्थसम्पत्करीं
ये मूढाः प्रविहाय यान्ति कुधियो मिथ्याफलान्वेषिणः ।
ते तेनैव निहत्य निर्दयतरं नग्नीकृता मुण्डिताः
केचित्पञ्चशिखीकृताश्च जटिलाः कापालिकाश्चापरे ॥
स्त्रीमुद्रां कुसुमायुधस्य जयिनीं सर्वार्थसम्पत्करीं
ये मूढाः प्रविहाय यान्ति कुधियो मिथ्याफलान्वेषिणः ।
ते तेनैव निहत्य निर्दयतरं नग्नीकृता मुण्डिताः
केचित्पञ्चशिखीकृताश्च जटिलाः कापालिकाश्चापरे ॥
ये मूढाः प्रविहाय यान्ति कुधियो मिथ्याफलान्वेषिणः ।
ते तेनैव निहत्य निर्दयतरं नग्नीकृता मुण्डिताः
केचित्पञ्चशिखीकृताश्च जटिलाः कापालिकाश्चापरे ॥
अन्वयः
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ये मूढाः कुधियः मिथ्या-फल-अन्वेषिणः कुसुम-आयुधस्य जयिनीम् सर्व-अर्थ-सम्पत्-करीम् स्त्री-मुद्राम् प्रविहाय यान्ति, ते तेन एव निर्दयतरम् निहत्य नग्नी-कृताः, मुण्डिताः, केचित् पञ्च-शिखी-कृताः च, अपरे जटिलाः कापालिकाः च (भवन्ति) ।
Summary
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Those foolish, wicked-minded seekers of false fruits who abandon the emblem of woman—which is the victorious, all-purpose-fulfilling seal of the flower-arrowed god (Cupid)—are struck down most mercilessly by him. They are made naked, shaven-headed, some with five tufts of hair, while others become matted-haired ascetics or Kapalikas.
सारांश
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कामदेव की विजय-मुद्रा और सर्वस्व रूपी स्त्री को त्याग कर जो मूर्ख मोक्ष जैसे मिथ्या फल की खोज में भटकते हैं, वे कामदेव द्वारा ही दंडित होकर नग्न, मुंडित, जटाधारी या कापालिक बना दिए जाते हैं।
पदच्छेदः
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| स्त्री-मुद्राम् | स्त्री–मुद्रा (२.१) | the emblem of woman |
| कुसुम-आयुधस्य | कुसुम–आयुध (६.१) | of the flower-arrowed one (Cupid) |
| जयिनीम् | जयिनी (२.१) | victorious |
| सर्व-अर्थ-सम्पत्-करीम् | सर्व–अर्थ–सम्पत्–करी (२.१) | fulfilling all purposes and wealth |
| ये | यद् (१.३) | those who |
| मूढाः | मूढ (√मुह्+क्त, १.३) | fools |
| प्रविहाय | प्रविहाय (प्र+वि√हा+ल्यप्) | having abandoned |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go |
| कुधियः | कुधी (१.३) | wicked-minded |
| मिथ्या-फल-अन्वेषिणः | मिथ्या–फल–अन्वेषिन् (१.३) | seekers of false fruits |
| ते | तद् (१.३) | they |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| एव | एव | indeed |
| निहत्य | निहत्य (नि√हन्+ल्यप्) | having been struck down |
| निर्दयतरम् | निर्दयतरम् | most mercilessly |
| नग्नी-कृताः | नग्नीकृत (√कृ+क्त, १.३) | are made naked |
| मुण्डिताः | मुण्डित (√मुण्ड्+क्त, १.३) | shaven-headed |
| केचित् | किञ्चित् (१.३) | some |
| पञ्च-शिखी-कृताः | पञ्चशिखीकृत (√कृ+क्त, १.३) | are made to have five tufts of hair |
| च | च | and |
| जटिलाः | जटिल (१.३) | matted-haired ascetics |
| कापालिकाः | कापालिक (१.३) | Kapalikas |
| च | च | and |
| अपरे | अपर (१.३) | others |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्त्री | मु | द्रां | कु | सु | मा | यु | ध | स्य | ज | यि | नीं | स | र्वा | र्थ | स | म्प | त्क | रीं |
| ये | मू | ढाः | प्र | वि | हा | य | या | न्ति | कु | धि | यो | मि | थ्या | फ | ला | न्वे | षि | णः |
| ते | ते | नै | व | नि | ह | त्य | नि | र्द | य | त | रं | न | ग्नी | कृ | ता | मु | ण्डि | ताः |
| के | चि | त्प | ञ्च | शि | खी | कृ | ता | श्च | ज | टि | लाः | का | पा | लि | का | श्चा | प | रे |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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