वचसि भवति सङ्गत्यागमुद्दिश्य वार्ता
श्रुतिमुखरमुखानां केवलं पण्डितानाम् ।
जघनमरुणरत्नग्रन्थिकाञ्चीकलापं
कुवलयनयनानां को विहातुं समर्थः ॥
वचसि भवति सङ्गत्यागमुद्दिश्य वार्ता
श्रुतिमुखरमुखानां केवलं पण्डितानाम् ।
जघनमरुणरत्नग्रन्थिकाञ्चीकलापं
कुवलयनयनानां को विहातुं समर्थः ॥
श्रुतिमुखरमुखानां केवलं पण्डितानाम् ।
जघनमरुणरत्नग्रन्थिकाञ्चीकलापं
कुवलयनयनानां को विहातुं समर्थः ॥
अन्वयः
AI
श्रुति-मुखर-मुखानाम् पण्डितानाम् सङ्ग-त्यागम् उद्दिश्य वार्ता केवलम् वचसि भवति । कुवलय-नयनानाम् अरुण-रत्न-ग्रन्थि-काञ्ची-कलापम् जघनम् विहातुम् कः समर्थः (अस्ति)?
Summary
AI
For pundits whose mouths are eloquent with scriptures, talk about renouncing attachment exists only in their speech. Who is truly capable of abandoning the hips of lotus-eyed women, adorned with girdles knotted with ruby-like gems?
सारांश
AI
वैराग्य की बातें केवल पंडितों के मुख से ही अच्छी लगती हैं। वास्तव में नीलकमल के समान नेत्रों वाली और रत्नमयी करधनी धारण करने वाली स्त्रियों का त्याग करने में कौन समर्थ है?
पदच्छेदः
AI
| वचसि | वचस् (७.१) | in speech |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| सङ्ग-त्यागम् | सङ्ग–त्याग (२.१) | renunciation of attachment |
| उद्दिश्य | उद्दिश्य (उद्√दिश्+ल्यप्) | regarding |
| वार्ता | वार्ता (१.१) | talk |
| श्रुति-मुखर-मुखानाम् | श्रुति–मुखर–मुख (६.३) | of those whose mouths are eloquent with scriptures |
| केवलम् | केवलम् | only |
| पण्डितानाम् | पण्डित (६.३) | of pundits |
| जघनम् | जघन (२.१) | the hips |
| अरुण-रत्न-ग्रन्थि-काञ्ची-कलापम् | अरुण–रत्न–ग्रन्थि–काञ्ची–कलाप (२.१) | adorned with a girdle knotted with ruby-like gems |
| कुवलय-नयनानाम् | कुवलय–नयन (६.३) | of the lotus-eyed women |
| कः | किम् (१.१) | who |
| विहातुम् | विहातुम् (वि√हा+तुमुन्) | to abandon |
| समर्थः | समर्थ (१.१) | is capable |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | च | सि | भ | व | ति | स | ङ्ग | त्या | ग | मु | द्दि | श्य | वा | र्ता |
| श्रु | ति | मु | ख | र | मु | खा | नां | के | व | लं | प | ण्डि | ता | नाम् |
| ज | घ | न | म | रु | ण | र | त्न | ग्र | न्थि | का | ञ्ची | क | ला | पं |
| कु | व | ल | य | न | य | ना | नां | को | वि | हा | तुं | स | म | र्थः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.