किं गतेन यदि सा न जीवति
प्राणिति प्रियतमा तथापि किम् ।
इत्युदीक्ष्य नवमेघमालिकां
न प्रयाति पथिकः स्वमन्दिरम् ॥

अन्वयः AI यदि सा न जीवति (तर्हि) गतेन किम्? प्रियतमा प्राणिति तथापि किम्? इति नव-मेघ-मालिकां उदीक्ष्य पथिकः स्व-मन्दिरं न प्रयाति ।
Summary AI "What is the use of my going if she is not alive? And even if my beloved is alive, what then?" Pondering thus while gazing at a line of new clouds, the traveler does not proceed to his own home.
सारांश AI बादलों की घटाओं को देखकर पथिक घर नहीं जाता; वह सोचता है कि यदि विरह में प्रियतमा मर गई तो जाने का क्या लाभ, और यदि वह जीवित है तो वह मेरे बिना भी जी लेगी।
पदच्छेदः AI
किम्किम् what (is the use)
गतेनगत (√गम्+क्त, ३.१) by going
यदियदि if
सातद् (१.१) she
not
जीवतिजीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) lives
प्राणितिप्राणिति (प्र√अन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) breathes/lives
प्रियतमाप्रियतमा (१.१) beloved
तथापितथापि even then
किम्किम् what (is the use)
इतिइति thus
उदीक्ष्यउदीक्ष्य (उद्√ईक्ष्+ल्यप्) having seen
नव-मेघ-मालिकांनवमेघमालिका (२.१) the line of new clouds
not
प्रयातिप्रयाति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) proceeds
पथिकःपथिक (१.१) the traveler
स्व-मन्दिरम्स्वमन्दिर (२.१) to his own home
छन्दः रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
किं ते दि सा जी ति
प्रा णि ति प्रि मा था पि कि
मि त्यु दी क्ष्य मे मा लि कां
प्र या ति थि कः स्व न्दि रम्
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