विस्तारितं मकरकेतनधीवरेण
स्त्रीसंज्ञितं बडिशमत्र भवाम्बुराशौ ।
येनाचिरात्तदधरामिषलोलमर्त्य
मत्स्यान्विकृष्य विपचत्यनुरागवह्नौ ॥

अन्वयः AI अत्र भव-अम्बु-राशौ मकर-केतन-धीवरेण स्त्री-संज्ञितं बडिशं विस्तारितम् । येन (सः) तत्-अधर-आमिष-लोल-मर्त्य-मत्स्यान् अचिरात् विकृष्य अनुराग-वह्नौ विपचति ।
Summary AI In this ocean of worldly existence, the fisherman Kamadeva has cast a fish-hook named "woman." With it, he quickly drags the mortal-fish, who are greedy for the bait of her lips, and cooks them in the fire of passion.
सारांश AI कामदेव रूपी मछुआरे ने इस संसार-सागर में स्त्री रूपी कांटा डाला है। वह अधर रूपी मांस के लोभी पुरुष रूपी मछलियों को खींचकर अनुराग की अग्नि में पकाता है।
पदच्छेदः AI
विस्तारितम्विस्तारित (वि√स्तृ+णिच्+क्त, १.१) spread out
मकर-केतन-धीवरेणमकर-केतनधीवर (३.१) by the fisherman, Kamadeva
स्त्री-संज्ञितम्स्त्री-संज्ञित (१.१) named woman
बडिशम्बडिश (१.१) fish-hook
अत्रअत्र here
भव-अम्बु-राशौभव–अम्बु-राशि (७.१) in the ocean of worldly existence
येनयद् (३.१) by which
अचिरात्अचिरात् quickly
तत्-अधर-आमिष-लोल-मर्त्य-मत्स्यान्तद्अधरआमिषलोलमर्त्यमत्स्य (२.३) the mortal-fish greedy for the bait of her lips
विकृष्यविकृष्य (वि√कृष्+ल्यप्) having dragged
विपचतिविपचति (वि√पच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) cooks thoroughly
अनुराग-वह्नौअनुराग-वह्नि (७.१) in the fire of passion
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
वि स्ता रि तं के धी रे
स्त्री सं ज्ञि तं डि त्र वा म्बु रा शौ
ये ना चि रा त्त रा मि लो र्त्य
त्स्या न्वि कृ ष्य वि त्य नु रा ह्नौ
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