उन्मीलत्त्रिवलीतरङ्गनिलया प्रोत्तुङ्गपीनस्तन-
द्वन्द्वेनोद्गत चक्रवाकयुगला वक्त्राम्बुजोद्भासिनी ।
कान्ताकारधरा नदीयमभितः क्रूरात्र नापेक्षते
संसारार्णवमज्जनं यदि तदा दूरेण सन्त्यज्यताम् ॥
उन्मीलत्त्रिवलीतरङ्गनिलया प्रोत्तुङ्गपीनस्तन-
द्वन्द्वेनोद्गत चक्रवाकयुगला वक्त्राम्बुजोद्भासिनी ।
कान्ताकारधरा नदीयमभितः क्रूरात्र नापेक्षते
संसारार्णवमज्जनं यदि तदा दूरेण सन्त्यज्यताम् ॥
द्वन्द्वेनोद्गत चक्रवाकयुगला वक्त्राम्बुजोद्भासिनी ।
कान्ताकारधरा नदीयमभितः क्रूरात्र नापेक्षते
संसारार्णवमज्जनं यदि तदा दूरेण सन्त्यज्यताम् ॥
अन्वयः
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उन्मीलत्-त्रिवली-तरङ्ग-निलया, प्र-उत्तुङ्ग-पीन-स्तन-द्वन्द्वेन उद्गत-चक्रवाक-युगला, वक्त्र-अम्बुज-उद्भासिनी, कान्ता-आकार-धरा इयं नदी अभितः क्रूरा (अस्ति) । यदि संसार-अर्णव-मज्जनं न अपेक्षते, तदा दूरेण सन्त्यज्यताम् ।
Summary
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This cruel river, in the form of a beloved woman—with waves of three folds, a pair of high breasts like Chakravaka birds, and a shining lotus-face—is cruel on all sides. If one does not desire to drown in the ocean of worldly existence, then she should be abandoned from a distance.
सारांश
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त्रिवली रूपी तरंगों, स्तनों रूपी चक्रवाक पक्षियों और मुख रूपी कमल वाली यह स्त्री-रूपी नदी अत्यंत क्रूर है। यदि संसार-सागर में डूबना नहीं चाहते, तो इससे दूर ही रहो।
पदच्छेदः
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| उन्मीलत्-त्रिवली-तरङ्ग-निलया | उन्मीलत् (उद्√मील्+शतृ)–त्रिवली–तरङ्ग–निलया (१.१) | abode of the waves of the unfolding three folds |
| प्रोత్తుङ्ग-पीन-स्तन-द्वन्द्वेन-उद्गत-चक्रवाक-युगला | प्र–उत्तुङ्ग–पीन–स्तन–द्वन्द्व–उद्गत (उद्√गम्+क्त)–चक्रवाक–युगला (१.१) | from whose pair of very high and full breasts a pair of Chakravaka birds has emerged |
| वक्त्राम्बुजोद्भासिनी | वक्त्र–अम्बुज–उद्भासिनी (उद्√भास्+णिनि, १.१) | shining with a lotus-face |
| कान्ता-आकार-धरा | कान्ता–आकार–धरा (१.१) | bearing the form of a beloved woman |
| नदी | नदी (१.१) | river |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| अभितः | अभितः | on all sides |
| क्रूरा | क्रूर (१.१) | cruel |
| अत्र | अत्र | here |
| न | न | not |
| अपेक्षते | अपेक्षते (अप√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | desires |
| संसार-अर्णव-मज्जनम् | संसार–अर्णव–मज्जन (२.१) | drowning in the ocean of worldly existence |
| यदि | यदि | if |
| तदा | तदा | then |
| दूरेण | दूर (३.१) | from afar |
| सन्त्यज्यताम् | सन्त्यज्यताम् (सम्√त्यज् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should be abandoned |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | न्मी | ल | त्त्रि | व | ली | त | र | ङ्ग | नि | ल | या | प्रो | त्तु | ङ्ग | पी | न | स्त | न |
| द्व | न्द्वे | नो | द्ग | त | च | क्र | वा | क | यु | ग | ला | व | क्त्रा | म्बु | जो | द्भा | सि | नी |
| का | न्ता | का | र | ध | रा | न | दी | य | म | भि | तः | क्रू | रा | त्र | ना | पे | क्ष | ते |
| सं | सा | रा | र्ण | व | म | ज्ज | नं | य | दि | त | दा | दू | रे | ण | स | न्त्य | ज्य | ताम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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