यदेतत्पूर्णेन्दु-द्युति-हरमुदाराकृति परं मुखाब्जं तन्वङ्ग्याः किल वसति यत्राधर-मधु ।इदं तत्किं पाक-द्रुम-फलमिदानीमतिरसव्यतीतेऽस्मिन्काले विषमिव भविष्य्त्यसुखदम् ॥
यदेतत्पूर्णेन्दु-द्युति-हरमुदाराकृति परं मुखाब्जं तन्वङ्ग्याः किल वसति यत्राधर-मधु ।इदं तत्किं पाक-द्रुम-फलमिदानीमतिरसव्यतीतेऽस्मिन्काले विषमिव भविष्य्त्यसुखदम् ॥
अन्वयः
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तन्वङ्ग्याः यत् एतत् पूर्ण-इन्दु-द्युति-हरम् उदार-आकृति परं मुख-अब्जं (अस्ति), यत्र किल अधर-मधु वसति, तत् इदं किं पाक-द्रुम-फलं (अस्ति)? अस्मिन् काले व्यतीते (सति) इदानीम् अतिरसं (इदं) विषम् इव असुखदं भविष्यति ।
Summary
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This supreme, noble-formed lotus-face of the slender woman, which steals the moon's lustre and where the honey of her lips resides—is it a fruit on a ripening tree? Now it is very sweet, but when this time has passed, it will become unpleasant like poison.
सारांश
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पूर्ण चंद्रमा के समान कांति वाला यह मुख, जिसके अधरों में मधु है, क्या किसी जहरीले फल के समान है जो समय बीतने पर अत्यंत कष्टकारी और विषैला हो जाएगा?
पदच्छेदः
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| यत् | यद् (१.१) | which |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| पूर्ण-इन्दु-द्युति-हरम् | पूर्ण–इन्दु–द्युति–हर (१.१) | stealing the lustre of the full moon |
| उदार-आकृति | उदार-आकृति (१.१) | of noble form |
| परम् | पर (१.१) | supreme |
| मुख-अब्जम् | मुख-अब्ज (१.१) | lotus-face |
| तन्वङ्ग्याः | तन्वङ्गी (६.१) | of the slender-limbed woman |
| किल | किल | indeed |
| वसति | वसति (√वस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | dwells |
| यत्र | यत्र | where |
| अधर-मधु | अधर-मधु (१.१) | the honey of the lips |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| किम् | किम् (१.१) | what? |
| पाक-द्रुम-फलम् | पाक-द्रुम-फल (१.१) | the fruit of a ripening tree |
| इदानीम् | इदानीम् | now |
| अतिरसम् | अतिरस (१.१) | very juicy/sweet |
| व्यतीते | व्यतीत (वि+अति√इ+क्त, ७.१) | having passed |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | in this |
| काले | काल (७.१) | time |
| विषम् | विष (१.१) | poison |
| इव | इव | like |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will become |
| असुखदम् | असुखद (१.१) | unpleasant |
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