लीलावतीनां सहजा विलासास्त एव मूढस्य हृदि स्फुरन्ति । रागो नलिन्या हि निसर्ग-सिद्धस्तत्र भ्रम्त्येव वृथा षड्-अङ्घ्रिः ॥
लीलावतीनां सहजा विलासास्त एव मूढस्य हृदि स्फुरन्ति । रागो नलिन्या हि निसर्ग-सिद्धस्तत्र भ्रम्त्येव वृथा षड्-अङ्घ्रिः ॥
अन्वयः
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लीलावतीनां विलासाः सहजाः (सन्ति) । ते एव मूढस्य हृदि स्फुरन्ति । हि नलिन्याः रागः निसर्ग-सिद्धः (अस्ति) । तत्र षट्-अङ्घ्रिः वृथा एव भ्रमति ।
Summary
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The charming gestures of playful women are natural to them, yet they excite the heart of a fool. Similarly, the redness of a lotus is natural, but the bee wanders there in vain, mistaking it for affection.
सारांश
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चंचल स्त्रियों के स्वाभाविक विलास ही मूर्ख के हृदय में बस जाते हैं। जैसे कमल की प्राकृतिक लालिमा पर भ्रमर व्यर्थ ही मंडराता रहता है, वैसे ही मोहित पुरुष भटकता है।
पदच्छेदः
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| लीलावतीनाम् | लीलावती (६.३) | of playful women |
| सहजाः | सहज (१.३) | natural/inborn |
| विलासाः | विलास (१.३) | charming gestures |
| ते | तद् (१.३) | they |
| एव | एव | only |
| मूढस्य | मूढ (६.१) | of a fool |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| स्फुरन्ति | स्फुरन्ति (√स्फुर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | throb/flash |
| रागः | राग (१.१) | redness/love |
| नलिन्याः | नलिनी (६.१) | of the lotus |
| हि | हि | for/indeed |
| निसर्ग-सिद्धः | निसर्ग-सिद्ध (१.१) | naturally established |
| तत्र | तत्र | there |
| भ्रमति | भ्रमति (√भ्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wanders |
| एव | एव | only |
| वृथा | वृथा | in vain |
| षट्-अङ्घ्रिः | षडङ्घ्रि (१.१) | the six-legged one (bee) |
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