अन्वयः
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(या) स्मृता तापाय भवति, दृष्टा च उन्माद-कारिणी (भवति), स्पृष्टा मोहाय भवति, सा नाम दयिता कथम्?
Summary
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When remembered, she causes torment; when seen, she causes madness; when touched, she leads to delusion. How can such a one be called "beloved"?
सारांश
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जिसका स्मरण संताप देता है, दर्शन उन्मत्त कर देता है और स्पर्श मोह में डाल देता है, उसे भला 'दयिता' (प्रियतमा) कैसे कहा जा सकता है?
पदच्छेदः
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| स्मृता | स्मृत (√स्मृ+क्त, १.१) | remembered |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | becomes |
| तापाय | ताप (४.१) | for torment |
| दृष्टा | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.१) | seen |
| च | च | and |
| उन्माद-कारिणी | उन्माद-कारिन् (१.१) | causing madness |
| स्पृष्टा | स्पृष्ट (√स्पृश्+क्त, १.१) | touched |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | becomes |
| मोहाय | मोह (४.१) | for delusion |
| सा | तद् (१.१) | she |
| नाम | नाम | indeed |
| दयिता | दयित (√दय्+क्त, १.१) | beloved |
| कथम् | कथम् | how |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्मृ | ता | भ | व | ति | ता | पा | य |
| दृ | ष्टा | चो | न्मा | द | का | रि | णी |
| स्पृ | ष्टा | भ | व | ति | मो | हा | य |
| सा | ना | म | द | यि | ता | क | थम् |
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