क्वचित्सभ्रूभङ्गैः क्वचिदपि च लज्जापरिगतैः
क्वचिद्भूरित्रस्तैः क्वचिदपि च लीलाविललितैः ।
कुमारीणामेतैर्मदनसुभगैर्नेत्रवलितैः
स्फुरन्नीलाब्जानां प्रकरपरिकीर्णा इव दिशः ॥

अन्वयः AI क्वचित् स-भ्रू-भङ्गैः, क्वचित् अपि च लज्जा-परिगतैः, क्वचित् भूरि-त्रस्तैः, क्वचित् अपि च लीला-विललितैः, मदन-सुभगैः एतैः कुमारीणाम् नेत्र-वलितैः दिशः स्फुरत्-नील-अब्जानाम् प्रकर-परिकीर्णाः इव (भवन्ति) ।
Summary AI With these glances of young maidens—sometimes with frowning eyebrows, sometimes filled with modesty, sometimes greatly frightened, and sometimes gracefully playful, all charming with love—the quarters seem as if scattered with clusters of blooming blue lotuses.
सारांश AI कुमारियों की कामदेव के समान मनोहर चितवन, जो कभी भौंहों के तिरछेपन, कभी लज्जा, कभी भय और कभी विलास से युक्त होती है, दिशाओं को खिले हुए नीले कमलों के समान सुशोभित कर देती है।
पदच्छेदः AI
क्वचित्क्वचित् sometimes
स-भ्रू-भङ्गैःभ्रूभङ्ग (३.३) with frowning eyebrows
क्वचित्क्वचित् sometimes
अपिअपि also
and
लज्जा-परिगतैःलज्जापरिगत (परि√गम्+क्त, ३.३) filled with modesty
क्वचित्क्वचित् sometimes
भूरि-त्रस्तैःभूरित्रस्त (३.३) greatly frightened
क्वचित्क्वचित् sometimes
अपिअपि also
and
लीला-विललितैःलीला–विललित (३.३) gracefully playful
कुमारीणाम्कुमारी (६.३) of young maidens
एतैःएतद् (३.३) by these
मदन-सुभगैःमदनसुभग (३.३) charming with love
नेत्र-वलितैःनेत्रवलित (३.३) glances
स्फुरत्-नील-अब्जानाम्स्फुरत्नीलअब्ज (६.३) of blooming blue lotuses
प्रकर-परिकीर्णाःप्रकरपरिकीर्ण (परि√कॄ+क्त, १.३) scattered with clusters
इवइव as if
दिशःदिश् (१.३) the quarters
छन्दः शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
क्व चि त्स भ्रू ङ्गैः क्व चि पि ज्जा रि तैः
क्व चि द्भू रि त्र स्तैः क्व चि पि ली ला वि लि तैः
कु मा री णा मे तै र्म सु गै र्ने त्र लि तैः
स्फु न्नी ला ब्जा नां प्र रि की र्णा दि शः
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