दिश वनहरिणीभ्यो वंशकाण्डच्छवीनां
कवलमुपलकोटिच्छिन्नमूलं कुशानाम् ।
शकयुवतिकपोलापाण्डुताम्बूलवल्ली-
दलमरुणनखाग्रैः पाटितं वा वधूभ्यः ॥

अन्वयः AI (हे मनः,) वंश-काण्ड-च्छवीनाम् वन-हरिणीभ्यः उपल-कोटि-च्छिन्न-मूलम् कुशानाम् कवलम् दिश, वा वधूभ्यः अरुण-नख-अग्रैः पाटितम् शक-युवति-कपोल-अपाण्डु-ताम्बूल-वल्ली-दलम् (दिश) ।
Summary AI Either give to the forest-does, whose beauty resembles bamboo stalks, a mouthful of Kusha grass with roots cut by a stone's edge, or give to your beloveds a betel leaf, pale like the cheeks of Shaka maidens, torn by your red fingernails.
सारांश AI या तो वन की हिरणियों को कुशों के कोमल ग्रास दो, या फिर सुंदरी वधुओं के कपोलों के समान गौर वर्ण वाले तांबूल-पत्रों को अपने नखों से खंडित कर उन्हें अर्पित करो।
पदच्छेदः AI
दिशदिश (√दिश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) Give
वन-हरिणीभ्यःवनहरिणी (४.३) to the forest-does
वंश-काण्ड-च्छवीनाम्वंशकाण्डछवि (६.३) whose beauty resembles bamboo stalks
कवलम्कवल (२.१) a mouthful
उपल-कोटि-च्छिन्न-मूलम्उपलकोटिछिन्न (√छिद्+क्त)मूल (२.१) with roots cut by the edge of a stone
कुशानाम्कुश (६.३) of Kusha grass
शक-युवति-कपोल-अपाण्डु-ताम्बूल-वल्ली-दलम्शकयुवतिकपोल–अपाण्डुताम्बूलवल्लीदल (२.१) a betel leaf, pale like the cheeks of Shaka maidens
अरुण-नख-अग्रैःअरुणनखअग्र (३.३) by red fingernails
पाटितम्पाटित (√पट्ट्+णिच्+क्त, २.१) torn
वावा or
वधूभ्यःवधू (४.३) to your beloveds
छन्दः मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५
दि रि णी भ्यो वं का ण्ड च्छ वी नां
मु को टि च्छि न्न मू लं कु शा नाम्
यु ति पो ला पा ण्डु ता म्बू ल्ली
रु खा ग्रैः पा टि तं वा धू भ्यः
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