सिद्धाध्यासितकन्दरे हरवृषस्कन्धावरुग्णद्रुमे
गङ्गाधौतशिलातले हिमवतः स्थाने स्थिते श्रेयसि ।
कः कुर्वीत शिरः प्रणाममलिनं म्लानं मनस्वी जनो
यद्वित्रस्तकुरङ्गशावनयना न स्युः स्मरास्त्रं स्त्रियः ॥
सिद्धाध्यासितकन्दरे हरवृषस्कन्धावरुग्णद्रुमे
गङ्गाधौतशिलातले हिमवतः स्थाने स्थिते श्रेयसि ।
कः कुर्वीत शिरः प्रणाममलिनं म्लानं मनस्वी जनो
यद्वित्रस्तकुरङ्गशावनयना न स्युः स्मरास्त्रं स्त्रियः ॥
गङ्गाधौतशिलातले हिमवतः स्थाने स्थिते श्रेयसि ।
कः कुर्वीत शिरः प्रणाममलिनं म्लानं मनस्वी जनो
यद्वित्रस्तकुरङ्गशावनयना न स्युः स्मरास्त्रं स्त्रियः ॥
अन्वयः
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यदि स्मर-अस्त्रम् वित्रस्त-कुरङ्ग-शाव-नयनाः स्त्रियः न स्युः, (तर्हि) सिद्ध-अध्यासित-कन्दरे, हर-वृष-स्कन्ध-अवरुग्ण-द्रुमे, गङ्गा-धौत-शिला-तले, श्रेयसि हिमवतः स्थाने स्थिते (सति), कः मनस्वी जनः शिरः प्रणाम-मलिनम् म्लानम् कुर्वीत?
Summary
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If women, Cupid's arrows, with eyes like those of a frightened fawn, did not exist, what self-respecting person would defile and wither his head by bowing to others, when there is the blessed abode of the Himalayas—with caves inhabited by Siddhas, trees rubbed by Shiva's bull, and stone slabs washed by the Ganges?
सारांश
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यदि मृगनयनी स्त्रियाँ कामदेव का अस्त्र न होतीं, तो कोई भी स्वाभिमानी पुरुष हिमालय की पवित्र गुफाओं को त्यागकर राजाओं के सामने सिर नहीं झुकाता।
पदच्छेदः
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| सिद्ध-अध्यासित-कन्दरे | सिद्ध–अध्यासित (अधि√आस्+क्त)–कन्दर (७.१) | with caves inhabited by Siddhas |
| हर-वृष-स्कन्ध-अवरुग्ण-द्रुमे | हर–वृष–स्कन्ध–अवरुग्ण (अव√रुज्+क्त)–द्रुम (७.१) | with trees rubbed by the shoulders of Shiva's bull |
| गङ्गा-धौत-शिला-तले | गङ्गा–धौत (√धाव्+क्त)–शिला–तल (७.१) | with stone slabs washed by the Ganges |
| हिमवतः | हिमवत् (६.१) | of the Himalayas |
| स्थाने | स्थान (७.१) | in the abode |
| स्थिते | स्थित (√स्था+क्त, ७.१) | being |
| श्रेयसि | श्रेयस् (७.१) | blessed |
| कः | किम् (१.१) | what |
| कुर्वीत | कुर्वीत (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | would make |
| शिरः | शिरस् (२.१) | his head |
| प्रणाम-मलिनम् | प्रणाम–मलिन (२.१) | defiled by bowing |
| म्लानम् | म्लान (√म्लै+क्त, २.१) | and withered |
| मनस्वी | मनस्विन् (१.१) | self-respecting |
| जनः | जन (१.१) | person |
| यत् | यद् | if |
| वित्रस्त-कुरङ्ग-शाव-नयनाः | वित्रस्त (वि√त्रस्+क्त)–कुरङ्ग–शाव–नयन (१.३) | with eyes like those of a frightened fawn |
| न | न | not |
| स्युः | स्युः (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | did exist |
| स्मर-अस्त्रम् | स्मर–अस्त्र (१.१) | Cupid's arrows |
| स्त्रियः | स्त्री (१.३) | women |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सि | द्धा | ध्या | सि | त | क | न्द | रे | ह | र | वृ | ष | स्क | न्धा | व | रु | ग्ण | द्रु | मे |
| ग | ङ्गा | धौ | त | शि | ला | त | ले | हि | म | व | तः | स्था | ने | स्थि | ते | श्रे | य | सि |
| कः | कु | र्वी | त | शि | रः | प्र | णा | म | म | लि | नं | म्ला | नं | म | न | स्वी | ज | नो |
| य | द्वि | त्र | स्त | कु | र | ङ्ग | शा | व | न | य | ना | न | स्युः | स्म | रा | स्त्रं | स्त्रि | यः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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