तस्याः स्तनौ यदि घनौ जघनं च हारि
वक्त्रं च चारु तव चित्त किमाकुलत्वम् ।
पुण्यं कुरुष्व यदि तेषु तवास्ति वाञ्छा
पुण्यैर्विना न हि भवन्ति समीहितार्थाः ॥
तस्याः स्तनौ यदि घनौ जघनं च हारि
वक्त्रं च चारु तव चित्त किमाकुलत्वम् ।
पुण्यं कुरुष्व यदि तेषु तवास्ति वाञ्छा
पुण्यैर्विना न हि भवन्ति समीहितार्थाः ॥
वक्त्रं च चारु तव चित्त किमाकुलत्वम् ।
पुण्यं कुरुष्व यदि तेषु तवास्ति वाञ्छा
पुण्यैर्विना न हि भवन्ति समीहितार्थाः ॥
अन्वयः
AI
(हे) चित्त, यदि तस्याः स्तनौ घनौ, जघनम् च हारि, वक्त्रम् च चारु (अस्ति), (तर्हि) तव किम् आकुलत्वम्? यदि तेषु तव वाञ्छा अस्ति, (तर्हि) पुण्यम् कुरुष्व । हि पुण्यैः विना समीहित-अर्थाः न भवन्ति ।
Summary
AI
O mind, if her breasts are full, her hips captivating, and her face lovely, why this agitation? If you desire these things, perform virtuous deeds. For without merit, desired objects are not attained.
सारांश
AI
हे मन! यदि उस सुन्दरी के स्तन, जघन और मुख मनोहर हैं, तो तू व्याकुल क्यों होता है? यदि तू उन्हें पाना चाहता है, तो पुण्य कर, क्योंकि पुण्यों के बिना अभीष्ट फल प्राप्त नहीं होते।
पदच्छेदः
AI
| तस्याः | तद् (६.१) | Her |
| स्तनौ | स्तन (१.२) | breasts |
| यदि | यदि | if |
| घनौ | घन (१.२) | are full |
| जघनम् | जघन (१.१) | hips |
| च | च | and |
| हारि | हारि (१.१) | are captivating |
| वक्त्रम् | वक्त्र (१.१) | face |
| च | च | and |
| चारु | चारु (१.१) | is lovely |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| चित्त | चित्त (८.१) | O mind |
| किम् | किम् (१.१) | why |
| आकुलत्वम् | आकुलत्व (१.१) | this agitation |
| पुण्यम् | पुण्य (२.१) | merit |
| कुरुष्व | कुरुष्व (√कृ कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | perform |
| यदि | यदि | if |
| तेषु | तद् (७.३) | in them |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| वाञ्छा | वाञ्छा (१.१) | desire |
| पुण्यैः | पुण्य (३.३) | by merit |
| विना | विना | without |
| न | न | not |
| हि | हि | for |
| भवन्ति | भवन्ति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are |
| समीहित-अर्थाः | समीहित (√समीह्+क्त)–अर्थ (१.३) | desired objects attained |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्याः | स्त | नौ | य | दि | घ | नौ | ज | घ | नं | च | हा | रि |
| व | क्त्रं | च | चा | रु | त | व | चि | त्त | कि | मा | कु | ल | त्वम् |
| पु | ण्यं | कु | रु | ष्व | य | दि | ते | षु | त | वा | स्ति | वा | ञ्छा |
| पु | ण्यै | र्वि | ना | न | हि | भ | व | न्ति | स | मी | हि | ता | र्थाः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.