वैराग्ये संचरत्येको नीतौ भ्रमति चापरः ।
शृङ्गारे रमते कश्चिद्भुवि भेदाः परस्परम् ॥

अन्वयः AI एकः वैराग्ये संचरति, अपरः च नीतौ भ्रमति, कश्चित् शृङ्गारे रमते। भुवि परस्परं भेदाः (सन्ति)।
Summary AI One person pursues the path of detachment, another is engrossed in ethics and policy, and someone else delights in the erotic sentiment. On this earth, there are mutual differences in people's inclinations.
सारांश AI इस संसार में व्यक्तियों की प्रवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं। कोई वैराग्य को अपनाता है, कोई नीति मार्ग पर चलता है, तो कोई शृंगार में डूबा रहता है। इस पृथ्वी पर मनुष्यों के स्वभाव और रुचियों में परस्पर अनेक भेद पाए जाते हैं।
पदच्छेदः AI
वैराग्येवैराग्य (७.१) In detachment
संचरतिसंचरति (सम्√चर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) engages in
एकःएक (१.१) One person
नीतौनीति (७.१) in ethics
भ्रमतिभ्रमति (√भ्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) is engaged in
and
अपरःअपर (१.१) another
शृङ्गारेशृङ्गार (७.१) in love
रमतेरमते (√रम् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) delights in
कश्चित्कश्चित् (१.१) someone
भुविभू (७.१) On earth
भेदाःभेद (१.३) differences
परस्परम्परस्परम् among each other
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वै रा ग्ये सं त्ये को
नी तौ भ्र ति चा रः
शृ ङ्गा रे ते श्चि
द्भु वि भे दाः स्प रम्
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