ब्रह्मा येन कुलालवन्नियमितो ब्रह्माडभाण्डोदरे
विष्णुर्येन दशावतारगहने क्षिप्तो महासङ्कटे ।
रुद्रो येन कपालपाणिपुटके भिक्षाटनं कारितः
सूर्यो भ्राम्यति नित्यमेव गगने तस्मै नमः कर्मणे ॥
ब्रह्मा येन कुलालवन्नियमितो ब्रह्माडभाण्डोदरे
विष्णुर्येन दशावतारगहने क्षिप्तो महासङ्कटे ।
रुद्रो येन कपालपाणिपुटके भिक्षाटनं कारितः
सूर्यो भ्राम्यति नित्यमेव गगने तस्मै नमः कर्मणे ॥
विष्णुर्येन दशावतारगहने क्षिप्तो महासङ्कटे ।
रुद्रो येन कपालपाणिपुटके भिक्षाटनं कारितः
सूर्यो भ्राम्यति नित्यमेव गगने तस्मै नमः कर्मणे ॥
अन्वयः
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येन ब्रह्मा ब्रह्माण्ड-भाण्ड-उदरे कुलालवत् नियमितः, येन विष्णुः दश-अवतार-गहने महा-सङ्कटे क्षिप्तः, येन रुद्रः कपाल-पाणि-पुटके भिक्षा-अटनम् कारितः, (येन) सूर्यः गगने नित्यम् एव भ्राम्यति, तस्मै कर्मणे नमः।
Summary
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Salutations to that Karma, by which Brahma is confined like a potter within the pot of the universe; by which Vishnu is thrown into the great trouble of the ten incarnations' dense forest; by which Rudra is made to wander for alms with a skull-bowl in hand; and by which the sun wanders eternally in the sky.
सारांश
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जिस कर्म ने ब्रह्मा को कुम्हार बनाया, विष्णु को अवतारों के कष्ट दिए, शिव को भिक्षाटन कराया और सूर्य को आकाश में भटकाया, उस कर्म को नमस्कार है।
पदच्छेदः
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| ब्रह्मा | ब्रह्मन् (१.१) | Brahma |
| येन | यद् (३.१) | by which |
| कुलालवत् | कुलालवत् | like a potter |
| नियमितः | नियमित (नि√यम्+क्त, १.१) | is confined |
| ब्रह्माण्ड | ब्रह्माण्ड | universe |
| भाण्ड | भाण्ड | pot's |
| उदरे | उदर (७.१) | within the |
| विष्णुः | विष्णु (१.१) | Vishnu |
| येन | यद् (३.१) | by which |
| दश | दशन् | ten |
| अवतार | अवतार | incarnations' |
| गहने | गहन (७.१) | in the dense forest |
| क्षिप्तः | क्षिप्त (√क्षिप्+क्त, १.१) | is thrown |
| महा | महत् | great |
| सङ्कटे | सङ्कट (७.१) | into trouble |
| रुद्रः | रुद्र (१.१) | Rudra |
| येन | यद् (३.१) | by which |
| कपाल | कपाल | skull |
| पाणि | पाणि | hand |
| पुटके | पुटक (७.१) | in the bowl of |
| भिक्षा | भिक्षा | alms |
| अटनम् | अटन (२.१) | wandering for |
| कारितः | कारित (√कृ+णिच्+क्त, १.१) | is made to do |
| सूर्यः | सूर्य (१.१) | the sun |
| भ्राम्यति | भ्राम्यति (√भ्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wanders |
| नित्यम् | नित्यम् | eternally |
| एव | एव | indeed |
| गगने | गगन (७.१) | in the sky |
| तस्मै | तद् (४.१) | to that |
| नमः | नमस् | salutations |
| कर्मणे | कर्मन् (४.१) | Karma |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्र | ह्मा | ये | न | कु | ला | ल | व | न्नि | य | मि | तो | ब्र | ह्मा | ड | भा | ण्डो | द | रे |
| वि | ष्णु | र्ये | न | द | शा | व | ता | र | ग | ह | ने | क्षि | प्तो | म | हा | स | ङ्क | टे |
| रु | द्रो | ये | न | क | पा | ल | पा | णि | पु | ट | के | भि | क्षा | ट | नं | का | रि | तः |
| सू | र्यो | भ्रा | म्य | ति | नि | त्य | मे | व | ग | ग | ने | त | स्मै | न | मः | क | र्म | णे |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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