नमस्यामो देवान्ननु हतविधेस्तेऽपि वशगा
विधिर्वन्द्यः सोऽपि प्रतिनियतकर्मैकफलदः ।
फलं कर्मायत्तं यदि किममरैः किं च विधिना
नमस्तत्कर्मभ्यो विधिरपि न येभ्यः प्रभवति ॥
नमस्यामो देवान्ननु हतविधेस्तेऽपि वशगा
विधिर्वन्द्यः सोऽपि प्रतिनियतकर्मैकफलदः ।
फलं कर्मायत्तं यदि किममरैः किं च विधिना
नमस्तत्कर्मभ्यो विधिरपि न येभ्यः प्रभवति ॥
विधिर्वन्द्यः सोऽपि प्रतिनियतकर्मैकफलदः ।
फलं कर्मायत्तं यदि किममरैः किं च विधिना
नमस्तत्कर्मभ्यो विधिरपि न येभ्यः प्रभवति ॥
अन्वयः
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देवान् नमस्यामः, ननु ते अपि हत-विधेः वशगाः। विधिः वन्द्यः, (किन्तु) सः अपि प्रतिनियत-कर्म-एक-फलदः। यदि फलम् कर्म-आयत्तम्, (तर्हि) अमरैः किम्? विधिना च किम्? तत् कर्मभ्यः नमः, येभ्यः विधिः अपि न प्रभवति।
Summary
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We bow to the gods, but surely, they too are subject to wretched fate. Fate is venerable, but it too only dispenses the fruit of one's pre-ordained actions. If the fruit depends on action, what is the use of the gods or of fate? Salutations to those actions, over which even fate has no power.
सारांश
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देवता और विधाता भी कर्मों के अधीन फल देते हैं। यदि सब कुछ कर्मों पर ही निर्भर है, तो उन कर्मों को नमस्कार है जिन पर विधाता का भी वश नहीं चलता।
पदच्छेदः
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| नमस्यामः | नमस्यामः (√नमस् +य कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | We bow |
| देवान् | देव (२.३) | to the gods |
| ननु | ननु | but surely |
| हत | हत | wretched |
| विधेः | विधि (६.१) | of fate |
| ते | तद् (१.३) | they |
| अपि | अपि | too |
| वशगाः | वशग (१.३) | are subject to |
| विधिः | विधि (१.१) | Fate |
| वन्द्यः | वन्द्य (√वन्द्+यत्, १.१) | is venerable |
| सः | तद् (१.१) | it |
| अपि | अपि | too |
| प्रतिनियत | प्रतिनियत | pre-ordained |
| कर्म | कर्मन् | action's |
| एक | एक | only |
| फलदः | फलद (१.१) | is the giver of fruit |
| फलम् | फल (१.१) | the fruit |
| कर्म | कर्मन् | on action |
| आयत्तम् | आयत्त (आ√यत्+क्त, १.१) | is dependent |
| यदि | यदि | if |
| किम् | किम् | what is the use |
| अमरैः | अमर (३.३) | of the gods |
| किम् | किम् | what is the use |
| च | च | and |
| विधिना | विधि (३.१) | of fate |
| नमः | नमस् | salutations |
| तत् | तद् | to those |
| कर्मभ्यः | कर्मन् (४.३) | actions |
| विधिः | विधि (१.१) | fate |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| येभ्यः | यद् (५.३) | over which |
| प्रभवति | प्रभवति (प्र√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | has power |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | म | स्या | मो | दे | वा | न्न | नु | ह | त | वि | धे | स्ते | ऽपि | व | श | गा |
| वि | धि | र्व | न्द्यः | सो | ऽपि | प्र | ति | नि | य | त | क | र्मै | क | फ | ल | दः |
| फ | लं | क | र्मा | य | त्तं | य | दि | कि | म | म | रैः | किं | च | वि | धि | ना |
| न | म | स्त | त्क | र्म | भ्यो | वि | धि | र | पि | न | ये | भ्यः | प्र | भ | व | ति |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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