नेता यस्य बृहस्पतिः प्रहरणं वज्रं सुराः सैनिकाः
स्वर्गो दुर्गमनुग्रहः किल हरेरैरावतो वारणः ।
इत्यैश्वर्यबलान्वितोऽपि बलभिद्भग्नः परैः सङ्गरे
तद्व्यक्तं ननु दैवमेव शरणं धिग्धिग्वृथा पौरुषम् ॥
नेता यस्य बृहस्पतिः प्रहरणं वज्रं सुराः सैनिकाः
स्वर्गो दुर्गमनुग्रहः किल हरेरैरावतो वारणः ।
इत्यैश्वर्यबलान्वितोऽपि बलभिद्भग्नः परैः सङ्गरे
तद्व्यक्तं ननु दैवमेव शरणं धिग्धिग्वृथा पौरुषम् ॥
स्वर्गो दुर्गमनुग्रहः किल हरेरैरावतो वारणः ।
इत्यैश्वर्यबलान्वितोऽपि बलभिद्भग्नः परैः सङ्गरे
तद्व्यक्तं ननु दैवमेव शरणं धिग्धिग्वृथा पौरुषम् ॥
अन्वयः
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यस्य नेता बृहस्पतिः, प्रहरणम् वज्रम्, सैनिकाः सुराः, दुर्गम् स्वर्गः, हरेः अनुग्रहः किल, वारणः ऐरावतः (अस्ति), इति ऐश्वर्य-बल-अन्वितः अपि बलभित् सङ्गरे परैः भग्नः। तत् व्यक्तम्, ननु दैवम् एव शरणम्। वृथा पौरुषम् धिक् धिक्।
Summary
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He whose leader is Brihaspati, weapon is the thunderbolt, soldiers are the gods, fortress is heaven, who has the grace of Hari, and whose elephant is Airavata—even such a well-equipped Indra was defeated by his enemies in battle. Therefore, it is clear that fate alone is the refuge. Fie on useless human effort!
सारांश
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बृहस्पति जैसे गुरु और वज्र जैसे शस्त्र के होते हुए भी इंद्र युद्ध में हार गए। अतः स्पष्ट है कि केवल भाग्य ही रक्षक है, बिना भाग्य के पुरुषार्थ व्यर्थ है।
पदच्छेदः
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| नेता | नेतृ (१.१) | leader |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| बृहस्पतिः | बृहस्पति (१.१) | is Brihaspati |
| प्रहरणम् | प्रहरण (१.१) | weapon |
| वज्रम् | वज्र (१.१) | is the thunderbolt |
| सुराः | सुर (१.३) | the gods |
| सैनिकाः | सैनिक (१.३) | are the soldiers |
| स्वर्गः | स्वर्ग (१.१) | heaven |
| दुर्गम् | दुर्ग (१.१) | is the fortress |
| अनुग्रहः | अनुग्रह (१.१) | the grace |
| किल | किल | indeed |
| हरेः | हरि (६.१) | of Hari (Vishnu) |
| ऐरावतः | ऐरावत (१.१) | Airavata |
| वारणः | वारण (१.१) | is the elephant |
| इति | इति | thus |
| ऐश्वर्य | ऐश्वर्य | with majesty |
| बल | बल | and power |
| अन्वितः | अन्वित (अनु√इ+क्त, १.१) | endowed |
| अपि | अपि | even |
| बलभित् | बलभिद् (१.१) | Indra |
| भग्नः | भग्न (√भञ्ज्+क्त, १.१) | was defeated |
| परैः | पर (३.३) | by enemies |
| सङ्गरे | सङ्गर (७.१) | in battle |
| तत् | तद् | therefore |
| व्यक्तम् | व्यक्तम् | it is clear |
| ननु | ननु | surely |
| दैवम् | दैव (१.१) | fate |
| एव | एव | alone |
| शरणम् | शरण (१.१) | is the refuge |
| धिक् | धिक् | fie |
| धिक् | धिक् | fie |
| वृथा | वृथा | on useless |
| पौरुषम् | पौरुष (२.१) | human effort |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ने | ता | य | स्य | बृ | ह | स्प | तिः | प्र | ह | र | णं | व | ज्रं | सु | राः | सै | नि | काः |
| स्व | र्गो | दु | र्ग | म | नु | ग्र | हः | कि | ल | ह | रे | रै | रा | व | तो | वा | र | णः |
| इ | त्यै | श्व | र्य | ब | ला | न्वि | तो | ऽपि | ब | ल | भि | द्भ | ग्नः | प | रैः | स | ङ्ग | रे |
| त | द्व्य | क्तं | न | नु | दै | व | मे | व | श | र | णं | धि | ग्धि | ग्वृ | था | पौ | रु | षम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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