भग्नाशस्य करण्डपिण्डिततनोर्म्लानेन्द्रियस्य क्षुधा
कृत्वाखुर्विवरं स्वयं निपतितो नक्तं मुखे भोगिनः ।
तृप्तस्तत्पिशितेन सत्वरमसौ तेनैव यातः यथा
लोकाः पश्यत दैवमेव हि नृणां वृद्धौ क्षये कारणम् ॥
भग्नाशस्य करण्डपिण्डिततनोर्म्लानेन्द्रियस्य क्षुधा
कृत्वाखुर्विवरं स्वयं निपतितो नक्तं मुखे भोगिनः ।
तृप्तस्तत्पिशितेन सत्वरमसौ तेनैव यातः यथा
लोकाः पश्यत दैवमेव हि नृणां वृद्धौ क्षये कारणम् ॥
कृत्वाखुर्विवरं स्वयं निपतितो नक्तं मुखे भोगिनः ।
तृप्तस्तत्पिशितेन सत्वरमसौ तेनैव यातः यथा
लोकाः पश्यत दैवमेव हि नृणां वृद्धौ क्षये कारणम् ॥
अन्वयः
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क्षुधा भग्न-आशस्य, करण्ड-पिण्डित-तनोः, म्लान-इन्द्रियस्य भोगिनः मुखे आखुः विवरम् कृत्वा नक्तम् स्वयम् निपतितः। असौ तत्-पिशितेन तृप्तः (सन्) तेन एव यथा (आगतः तथा) सत्वरम् यातः। लोकाः, पश्यत, नृणाम् वृद्धौ क्षये दैवम् एव हि कारणम् (अस्ति)।
Summary
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A snake, with hope broken, body coiled in a basket, and senses weakened by hunger, had a mouse fall into its mouth at night after making a hole. Satisfied with its flesh, the mouse quickly went out the same way. O people, see! Fate alone is the cause of prosperity and decline for men.
सारांश
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पिटारे में बंद भूखे सांप के मुख में एक चूहा स्वयं गिर गया, जिसे खाकर सांप उसी के बनाए छेद से बाहर निकल गया। स्पष्ट है कि मनुष्य की उन्नति और पतन में भाग्य ही मुख्य कारण है।
पदच्छेदः
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| भग्न | भग्न (√भञ्ज्+क्त) | broken |
| आशस्य | आश (६.१) | whose hope |
| करण्ड | करण्ड | in a basket |
| पिण्डित | पिण्डित | coiled |
| तनोः | तनु (६.१) | whose body |
| म्लान | म्लान (√म्लै+क्त) | withered |
| इन्द्रियस्य | इन्द्रिय (६.१) | whose senses |
| क्षुधा | क्षुधा (३.१) | by hunger |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| आखुः | आखु (१.१) | a mouse |
| विवरम् | विवर (२.१) | a hole |
| स्वयम् | स्वयम् | itself |
| निपतितः | निपतित (नि√पत्+क्त, १.१) | fell |
| नक्तम् | नक्तम् | at night |
| मुखे | मुख (७.१) | in the mouth |
| भोगिनः | भोगिन् (६.१) | of a snake |
| तृप्तः | तृप्त (√तृप्+क्त, १.१) | satisfied |
| तत् | तद् | its |
| पिशितेन | पिशित (३.१) | with the flesh |
| सत्वरम् | सत्वरम् | quickly |
| असौ | अदस् (१.१) | he (the mouse) |
| तेन | तद् (३.१) | by that same (path) |
| एव | एव | indeed |
| यातः | यात (√या+क्त, १.१) | went |
| यथा | यथा | as (he came) |
| लोकाः | लोक (८.३) | O people |
| पश्यत | पश्यत (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | see |
| दैवम् | दैव (१.१) | fate |
| एव | एव | alone |
| हि | हि | indeed |
| नृणाम् | नृ (६.३) | of men |
| वृद्धौ | वृद्धि (७.१) | in prosperity |
| क्षये | क्षय (७.१) | and in decline |
| कारणम् | कारण (१.१) | is the cause |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | ग्ना | श | स्य | क | र | ण्ड | पि | ण्डि | त | त | नो | र्म्ला | ने | न्द्रि | य | स्य | क्षु | धा |
| कृ | त्वा | खु | र्वि | व | रं | स्व | यं | नि | प | ति | तो | न | क्तं | मु | खे | भो | गि | नः |
| तृ | प्त | स्त | त्पि | शि | ते | न | स | त्व | र | म | सौ | ते | नै | व | या | तः | य | था |
| लो | काः | प | श्य | त | दै | व | मे | व | हि | नृ | णां | वृ | द्धौ | क्ष | ये | का | र | णम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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