क्वचित्पृथ्वीशय्यः क्वचिदपि च परङ्कशयनः
क्वचिच्छाकाहारः क्वचिदपि च शाल्योदनरुचिः ।
क्वचित्कन्थाधारी क्वचिदपि च दिव्याम्बरधरो
मनस्वी कार्यार्थी न गणयति दुःखं न च सुखम् ॥

अन्वयः AI मनस्वी कार्य-अर्थी क्वचित् पृथ्वी-शय्यः, क्वचित् अपि च पर्यङ्क-शयनः, क्वचित् शाक-आहारः, क्वचित् अपि च शालि-ओदन-रुचिः, क्वचित् कन्था-धारी, क्वचित् अपि च दिव्य-अम्बर-धरः (भवति)। सः दुःखम् न गणयति, सुखम् च न (गणयति)।
Summary AI A determined person seeking to accomplish a goal sometimes sleeps on the bare ground and sometimes on a fine bed; sometimes eats only vegetables and sometimes relishes fine rice; sometimes wears rags and sometimes divine clothes. He pays no heed to sorrow or joy.
सारांश AI कार्य सिद्ध करने की इच्छा रखने वाला मनस्वी सुख-दुःख की चिंता नहीं करता। वह कभी जमीन पर सोता है तो कभी पलंग पर, कभी साधारण भोजन करता है तो कभी उत्तम अन्न, और कभी फटे कपड़े पहनता है तो कभी दिव्य वस्त्र।
पदच्छेदः AI
क्वचित्क्वचित् sometimes
पृथ्वीपृथ्वी on the earth
शय्यःशय्य (१.१) sleeping
क्वचित्क्वचित् sometimes
अपिअपि also
and
पर्यङ्कपर्यङ्क on a couch
शयनःशयन (१.१) lying
क्वचित्क्वचित् sometimes
शाकशाक vegetable
आहारःआहार (१.१) eating
क्वचित्क्वचित् sometimes
अपिअपि also
and
शालिशालि fine
ओदनओदन rice
रुचिःरुचि (१.१) relishing
क्वचित्क्वचित् sometimes
कन्थाकन्था rags
धारीधारिन् (१.१) wearing
क्वचित्क्वचित् sometimes
अपिअपि also
and
दिव्यदिव्य divine
अम्बरअम्बर clothes
धरःधर (१.१) wearing
मनस्वीमनस्विन् (१.१) A determined person
कार्यकार्य goal
अर्थीअर्थिन् (१.१) seeking
does not
गणयतिगणयति (√गण् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) count
दुःखम्दुःख (२.१) sorrow
nor
and
सुखम्सुख (२.१) joy
छन्दः शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
क्व चि त्पृ थ्वी य्यः क्व चि पि ङ्क नः
क्व चि च्छा का हा रः क्व चि पि शा ल्यो रु चिः
क्व चि त्क न्था धा री क्व चि पि दि व्या म्ब रो
स्वी का र्या र्थी ति दुः खं सु खम्
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