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तृष्णां छिन्धि भज क्षमां जहि मदं पापे रतिं मा कृथाः
सत्यं ब्रूह्यनुयाहि साधुपदवीं सेवस्व विद्वज्जनम् ।
मान्यान्मानय विद्विषोऽप्यनुनय प्रख्यापय प्रश्रयं
कीर्तिं पालय दुःखिते कुरु दयामेतत्सतां चेष्टितम् ॥

अन्वयः AI तृष्णाम् छिन्धि। क्षमाम् भज। मदम् जहि। पापे रतिम् मा कृथाः। सत्यम् ब्रूहि। साधु-पदवीम् अनुयाहि। विद्वत्-जनम् सेवस्व। मान्यान् मानय। विद्विषः अपि अनुनय। प्रश्रयम् प्रख्यापय। कीर्तिम् पालय। दुःखिते दयाम् कुरु। एतत् सताम् चेष्टितम् (अस्ति)।
Summary AI Cut greed, practice forgiveness, destroy pride, do not delight in sin. Speak the truth, follow the path of the virtuous, serve the learned. Honor the honorable, conciliate even enemies, display humility. Protect your fame, show compassion to the suffering. This is the conduct of the good.
सारांश AI इच्छाओं का त्याग करें, क्षमा अपनाएँ, अहंकार छोड़ें, पाप न करें, सत्य बोलें, सज्जनों के मार्ग पर चलें, विद्वानों की सेवा करें, पूजनीय का सम्मान करें और दुःखियों पर दया करें—यही सज्जनों का आचरण है।
पदच्छेदः AI
तृष्णाम्तृष्णा (२.१) Greed
छिन्धिछिन्धि (√छिद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) cut off
भजभज (√भज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) practice
क्षमाम्क्षमा (२.१) forgiveness
जहिजहि (√हन् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) destroy
मदम्मद (२.१) pride
पापेपाप (७.१) in sin
रतिम्रति (२.१) delight
मामा do not
कृथाःकृथाः (√कृ कर्तरि लुङ् (आत्मने.) म.पु. एक.) do
सत्यम्सत्य (२.१) truth
ब्रूहिब्रूहि (√ब्रू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) speak
अनुयाहिअनुयाहि (अनु√या कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) follow
साधुसाधु of the virtuous
पदवीम्पदवी (२.१) the path
सेवस्वसेवस्व (√सेव् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) serve
विद्वत्विद्वस् learned
जनम्जन (२.१) people
मान्यान्मान्य (२.३) the honorable
मानयमानय (√मन् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) honor
विद्विषःविद्विष् (२.३) enemies
अपिअपि even
अनुनयअनुनय (अनु√नी कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) conciliate
प्रख्यापयप्रख्यापय (प्र√ख्या +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) display
प्रश्रयम्प्रश्रय (२.१) humility
कीर्तिम्कीर्ति (२.१) fame
पालयपालय (√पाल् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) protect
दुःखितेदुःखित (७.१) to the suffering
कुरुकुरु (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) show
दयाम्दया (२.१) compassion
एतत्एतद् (१.१) this
सताम्सत् (६.३) of the good
चेष्टितम्चेष्टित (√चेष्ट्+क्त, १.१) is the conduct
छन्दः शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९
तृ ष्णां छि न्धि क्ष मां हि दं पा पे तिं मा कृ थाः
त्यं ब्रू ह्य नु या हि सा धु वीं से स्व वि द्व ज्ज नम्
मा न्या न्मा वि द्वि षो ऽप्य नु प्र ख्या प्र श्र यं
की र्तिं पा दुः खि ते कु रु या मे त्स तां चे ष्टि तम्
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