करे श्लाघ्यस्त्यागः शिरसि गुरुपादप्रणयिता
मुखे सत्या वाणी विजयि भुजयोर्वीर्यमतुलम् ।
हृदि स्वच्छा वृत्तिः श्रुतिमधिगतं च श्रवणयो-
र्विनाप्यैश्वर्येण प्रकृतिमहतां मण्डनमिदम् ॥
करे श्लाघ्यस्त्यागः शिरसि गुरुपादप्रणयिता
मुखे सत्या वाणी विजयि भुजयोर्वीर्यमतुलम् ।
हृदि स्वच्छा वृत्तिः श्रुतिमधिगतं च श्रवणयो-
र्विनाप्यैश्वर्येण प्रकृतिमहतां मण्डनमिदम् ॥
मुखे सत्या वाणी विजयि भुजयोर्वीर्यमतुलम् ।
हृदि स्वच्छा वृत्तिः श्रुतिमधिगतं च श्रवणयो-
र्विनाप्यैश्वर्येण प्रकृतिमहतां मण्डनमिदम् ॥
अन्वयः
AI
करे श्लाघ्यः त्यागः, शिरसि गुरु-पाद-प्रणयिता, मुखे सत्या वाणी, भुजयोः विजयि अतुलम् वीर्यम्, हृदि स्वच्छा वृत्तिः, श्रवणयोः च श्रुतिम् अधिगतम्, इदम् ऐश्वर्येण विना अपि प्रकृति-महताम् मण्डनम् (अस्ति)।
Summary
AI
Praiseworthy charity from the hand, reverence for the feet of elders on the head, truthful speech in the mouth, unparalleled and victorious valor in the arms, a pure disposition in the heart, and scriptural knowledge in the ears—these are the natural ornaments of the great, even without wealth.
सारांश
AI
हाथ में दान, सिर पर गुरु चरणों का प्रणाम, मुख में सत्य वाणी, भुजाओं में अतुलनीय पराक्रम, हृदय में शुद्ध आचरण और कानों में शास्त्र श्रवण—ये महापुरुषों के वास्तविक आभूषण हैं जो बिना ऐश्वर्य के भी शोभा देते हैं।
पदच्छेदः
AI
| करे | कर (७.१) | In the hand |
| श्लाघ्यः | श्लाघ्य (√श्लाघ्+यत्, १.१) | praiseworthy |
| त्यागः | त्याग (१.१) | charity |
| शिरसि | शिरस् (७.१) | on the head |
| गुरु-पाद-प्रणयिता | गुरु–पाद–प्रणयिता (१.१) | reverence for the feet of elders |
| मुखे | मुख (७.१) | in the mouth |
| सत्या | सत्या (१.१) | truthful |
| वाणी | वाणी (१.१) | speech |
| विजयि | विजयिन् (१.१) | victorious |
| भुजयोः | भुज (७.२) | in the two arms |
| वीर्यम् | वीर्य (१.१) | valor |
| अतुलम् | अतुल (१.१) | unparalleled |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| स्वच्छा | स्वच्छा (१.१) | pure |
| वृत्तिः | वृत्ति (१.१) | disposition |
| श्रुतिम् | श्रुति (२.१) | scriptural knowledge |
| अधिगतम् | अधिगत (अधि√गम्+क्त, १.१) | acquired |
| च | च | and |
| श्रवणयोः | श्रवण (७.२) | in the two ears |
| विना | विना | without |
| अपि | अपि | even |
| ऐश्वर्येण | ऐश्वर्य (३.१) | wealth |
| प्रकृति-महताम् | प्रकृति–महत् (६.३) | of the naturally great |
| मण्डनम् | मण्डन (१.१) | ornament |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | रे | श्ला | घ्य | स्त्या | गः | शि | र | सि | गु | रु | पा | द | प्र | ण | यि | ता |
| मु | खे | स | त्या | वा | णी | वि | ज | यि | भु | ज | यो | र्वी | र्य | म | तु | लम् |
| हृ | दि | स्व | च्छा | वृ | त्तिः | श्रु | ति | म | धि | ग | तं | च | श्र | व | ण | यो |
| र्वि | ना | प्यै | श्व | र्ये | ण | प्र | कृ | ति | म | ह | तां | म | ण्ड | न | मि | दम् |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.