अन्वयः
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चण्ड-कोपानाम् भूभुजाम् कश्चित् नाम आत्मीयः न (भवति)। पावकः स्पृष्टः (सन्) जुह्वानम् होतारम् अपि दहति।
Summary
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For fiercely angry kings, there is no one who can be called their own. Just as fire, when touched, burns even the priest who is offering oblations into it.
सारांश
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अत्यंत क्रोधी राजाओं का अपना कोई प्रिय नहीं होता। अग्नि आहुति देने वाले पुरोहित को भी स्पर्श करने पर जला ही देती है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) | anyone |
| चण्ड-कोपानाम् | चण्ड–कोप (६.३) | of the fiercely angry |
| आत्मीयः | आत्मीय (१.१) | their own |
| नाम | नाम | indeed |
| भूभुजाम् | भूभुज् (६.३) | kings |
| होतारम् | होतृ (२.१) | the priest |
| अपि | अपि | even |
| जुह्वानम् | जुह्वान (√हु+शानच्, २.१) | who is offering oblations |
| स्पृष्टः | स्पृष्ट (√स्पृश्+क्त, १.१) | when touched |
| दहति | दहति (√दह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | burns |
| पावकः | पावक (१.१) | fire |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | क | श्चि | च्च | ण्ड | को | पा | ना |
| मा | त्मी | यो | ना | म | भू | भु | जाम् |
| हो | ता | र | म | पि | जु | ह्वा | नं |
| स्पृ | ष्टो | द | ह | ति | पा | व | कः |
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