प्राणाघातान्निवृत्तिः परधनहरणे संयमः सत्यवाक्यं
काले शक्त्या प्रदानं युवतिजनकथामूकभावः परेषाम् ।
तृष्णास्रोतो विभङ्गो गुरुषु च विनयः सर्वभूतानुकम्पा
सामान्यः सर्वशास्त्रेष्वनुपहतविधिः श्रेयसामेष पन्थाः ॥
प्राणाघातान्निवृत्तिः परधनहरणे संयमः सत्यवाक्यं
काले शक्त्या प्रदानं युवतिजनकथामूकभावः परेषाम् ।
तृष्णास्रोतो विभङ्गो गुरुषु च विनयः सर्वभूतानुकम्पा
सामान्यः सर्वशास्त्रेष्वनुपहतविधिः श्रेयसामेष पन्थाः ॥
काले शक्त्या प्रदानं युवतिजनकथामूकभावः परेषाम् ।
तृष्णास्रोतो विभङ्गो गुरुषु च विनयः सर्वभूतानुकम्पा
सामान्यः सर्वशास्त्रेष्वनुपहतविधिः श्रेयसामेष पन्थाः ॥
अन्वयः
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प्राणाघातात् निवृत्तिः, पर-धन-हरणे संयमः, सत्य-वाक्यम्, काले शक्त्या प्रदानम्, परेषाम् युवति-जन-कथा-मूक-भावः, तृष्णा-स्रोतः विभङ्गः, गुरुषु विनयः, च सर्व-भूतानुकम्पा, (इति) एषः सर्व-शास्त्रेषु सामान्यः अनुपहत-विधिः श्रेयसाम् पन्थाः (अस्ति) ।
Summary
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This verse outlines the path to well-being, common to all scriptures: abstaining from harming living beings, restraining from stealing others' wealth, speaking the truth, giving charity according to one's ability, remaining silent during talk about others' women, breaking the flow of desire, showing humility towards elders, and having compassion for all creatures. This is the universally prescribed path to ultimate good.
सारांश
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हिंसा से दूर रहना, पराया धन न लेना, सत्य बोलना, सामर्थ्य अनुसार दान, परस्त्री की चर्चा न करना, लोभ का त्याग, गुरुओं के प्रति विनय और प्राणियों पर दया—यह सभी शास्त्रों में सम्मत कल्याण का मार्ग है।
पदच्छेदः
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| प्राणाघातात् | प्राण–आघात (५.१) | from injury to life |
| निवृत्तिः | निवृत्ति (१.१) | abstinence |
| पर-धन-हरणे | पर–धन–हरण (७.१) | in the matter of stealing others' wealth |
| संयमः | संयम (१.१) | restraint |
| सत्य-वाक्यम् | सत्य–वाक्य (१.१) | truthful speech |
| काले | काल (७.१) | at the right time |
| शक्त्या | शक्ति (३.१) | according to one's ability |
| प्रदानम् | प्रदान (१.१) | giving |
| युवति-जन-कथा-मूक-भावः | युवति–जन–कथा–मूक–भाव (१.१) | the state of being silent in conversations about others' young women |
| परेषाम् | पर (६.३) | of others' |
| तृष्णा-स्रोतः | तृष्णा–स्रोतस् (१.१) | the stream of desire |
| विभङ्गः | विभङ्ग (१.१) | breaking |
| गुरुषु | गुरु (७.३) | towards elders |
| च | च | and |
| विनयः | विनय (१.१) | humility |
| सर्व-भूतानुकम्पा | सर्व–भूत–अनुकम्पा (१.१) | compassion for all beings |
| सामान्यः | सामान्य (१.१) | common |
| सर्व-शास्त्रेषु | सर्व–शास्त्र (७.३) | in all scriptures |
| अनुपहत-विधिः | न–उपहत–विधि (१.१) | an uncontradicted rule |
| श्रेयसाम् | श्रेयस् (६.३) | of blessings |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| पन्थाः | पथिन् (१.१) | is the path |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | णा | घा | ता | न्नि | वृ | त्तिः | प | र | ध | न | ह | र | णे | सं | य | मः | स | त्य | वा | क्यं |
| का | ले | श | क्त्या | प्र | दा | नं | यु | व | ति | ज | न | क | था | मू | क | भा | वः | प | रे | षाम् |
| तृ | ष्णा | स्रो | तो | वि | भ | ङ्गो | गु | रु | षु | च | वि | न | यः | स | र्व | भू | ता | नु | क | म्पा |
| सा | मा | न्यः | स | र्व | शा | स्त्रे | ष्व | नु | प | ह | त | वि | धिः | श्रे | य | सा | मे | ष | प | न्थाः |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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