अन्वयः
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ते सुकृतिनः रस-सिद्धाः कवि-ईश्वराः जयन्ति, येषाम् यशः-काये जरा-मरण-जम् भयम् न अस्ति ।
Summary
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Victorious are those meritorious and great poets, masters of aesthetic sentiment, for whom there is no fear of old age and death in their body of fame.
सारांश
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वे पुण्यात्मा और रस-सिद्ध श्रेष्ठ कवि सदा विजयी होते हैं, जिनके यश रूपी शरीर को बुढ़ापे और मृत्यु से उत्पन्न होने वाला कोई भय नहीं होता।
पदच्छेदः
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| जयन्ति | जयन्ति (√जि कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are victorious |
| ते | तद् (१.३) | Those |
| सुकृतिनः | सुकृतिन् (१.३) | virtuous |
| रस-सिद्धाः | रससिद्ध (१.३) | perfected in aesthetic sentiment |
| कवि-ईश्वराः | कवीश्वर (१.३) | great poets |
| न | न | not |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there is |
| येषाम् | यद् (६.३) | for whose |
| यशः-काये | यशःकाय (७.१) | in the body of fame |
| जरा-मरण-जम् | जरामरणज (१.१) | born of old age and death |
| भयम् | भय (१.१) | fear |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | य | न्ति | ते | सु | कृ | ति | नो |
| र | स | सि | द्धाः | क | वी | श्व | राः |
| ना | स्ति | ये | षां | य | शः | का | ये |
| ज | रा | म | र | ण | जं | भ | यम् |
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