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अम्भोजिनीवनविहारविलासमेव
हंसस्य हन्ति नितरां कुपितो विधाता ।
न त्वस्य दुग्धजलभेदविधौ प्रसिद्धां
वैदग्धीकीर्तिमपहर्तुमसौ समर्थः ॥

अन्वयः AI कुपितः विधाता हंसस्य अम्भोजिनी-वन-विहार-विलासम् एव नितराम् हन्ति । तु असौ अस्य दुग्ध-जल-भेद-विधौ प्रसिद्धाम् वैदग्धी-कीर्तिम् अपहर्तुम् न समर्थः (अस्ति) ।
Summary AI An angered Creator can, at most, destroy a swan's pleasure of sporting in a lotus forest. But He is not capable of taking away its famous skill in separating milk from water.
सारांश AI भाग्य क्रोधित होकर हंस के सुख-साधनों को नष्ट कर सकता है, परंतु उसके दूध और पानी को अलग करने के स्वाभाविक कौशल और ख्याति को कभी नहीं छीन सकता।
पदच्छेदः AI
अम्भोजिनी-वन-विहार-विलासम्अम्भोजिनीवनविहारविलास (२.१) the pleasure of sporting in a lotus forest
एवएव only
हंसस्यहंस (६.१) of the swan
हन्तिहन्ति (√हन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) destroys
नितराम्नितराम् completely
कुपितःकुपित (√कुप्+क्त, १.१) An angered
विधाताविधातृ (१.१) Creator
not
तुतु but
अस्यइदम् (६.१) its
दुग्ध-जल-भेद-विधौदुग्धजलभेदविधि (७.१) in the act of separating milk from water
प्रसिद्धाम्प्रसिद्ध (प्र√सिध्+क्त, २.१) famous
वैदग्धी-कीर्तिम्वैदग्धीकीर्ति (२.१) fame for skill
अपहर्तुम्अपहर्तुम् (अप√हृ+तुमुन्) to take away
असौअदस् (१.१) He
समर्थःसमर्थ (१.१) is capable
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
म्भो जि नी वि हा वि ला मे
हं स्य न्ति नि रां कु पि तो वि धा ता
त्व स्य दु ग्ध भे वि धौ प्र सि द्धां
वै ग्धी की र्ति र्तु सौ र्थः
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