वह्निस्तस्य जलायते जलनिधिः कुल्यायते तत्क्षणा-
न्मेरुः स्वल्पशिलायते मृगपतिः सद्यः कुरङ्गायते ।
व्यालो माल्यगुणायते विषरसः पीयूषवर्षायते
यस्याङ्गेऽखिललोकवल्लभतमं शीलं समुन्मीलति ॥
वह्निस्तस्य जलायते जलनिधिः कुल्यायते तत्क्षणा-
न्मेरुः स्वल्पशिलायते मृगपतिः सद्यः कुरङ्गायते ।
व्यालो माल्यगुणायते विषरसः पीयूषवर्षायते
यस्याङ्गेऽखिललोकवल्लभतमं शीलं समुन्मीलति ॥
न्मेरुः स्वल्पशिलायते मृगपतिः सद्यः कुरङ्गायते ।
व्यालो माल्यगुणायते विषरसः पीयूषवर्षायते
यस्याङ्गेऽखिललोकवल्लभतमं शीलं समुन्मीलति ॥
अन्वयः
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यस्य अङ्गे अखिल-लोक-वल्लभतमम् शीलम् समुन्मीलति, तस्य वह्निः जलायते, जल-निधिः तत्-क्षणात् कुल्यायते, मेरुः स्वल्प-शिलायते, मृग-पतिः सद्यः कुरङ्गायते, व्यालः माल्य-गुणायते, विष-रसः पीयूष-वर्षायते ।
Summary
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For one in whom good character, most beloved by all worlds, manifests, fire acts like water, the ocean becomes a stream, Mount Meru a pebble, the lion a deer, a serpent a garland, and poison a shower of nectar.
सारांश
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जिस व्यक्ति का शील श्रेष्ठ और सर्वप्रिय होता है, उसके लिए अग्नि जल बन जाती है, समुद्र छोटी नहर बन जाता है, सुमेरु पर्वत पत्थर के समान और सिंह हिरण के समान हो जाता है। यहाँ तक कि विष भी अमृत के समान फल देने लगता है।
पदच्छेदः
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| वह्निः | वह्नि (१.१) | Fire |
| तस्य | तद् (६.१) | for him |
| जलायते | जलायते (√जल +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | acts like water |
| जल-निधिः | जलनिधि (१.१) | the ocean |
| कुल्यायते | कुल्यायते (√कुल्या +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | acts like a small stream |
| तत्-क्षणात् | तत्क्षणात् | instantly |
| मेरुः | मेरु (१.१) | Meru |
| स्वल्प-शिलायते | स्वल्पशिलायते (√स्वल्पशिला +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | becomes a small pebble |
| मृग-पतिः | मृगपति (१.१) | the lion |
| सद्यः | सद्यस् | immediately |
| कुरङ्गायते | कुरङ्गायते (√कुरङ्ग +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | acts like a deer |
| व्यालः | व्याल (१.१) | a serpent |
| माल्य-गुणायते | माल्यगुणायते (√माल्यगुण +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | becomes a garland |
| विष-रसः | विषरस (१.१) | the essence of poison |
| पीयूष-वर्षायते | पीयूषवर्षायते (√पीयूषवर्ष +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | becomes a shower of nectar |
| यस्य | यद् (६.१) | in whom |
| अङ्गे | अङ्ग (७.१) | in the person |
| अखिल-लोक-वल्लभतमम् | अखिल–लोक–वल्लभतम (१.१) | most beloved by all the worlds |
| शीलम् | शील (१.१) | good character |
| समुन्मीलति | समुन्मीलति (सम्+उद्√मील् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | manifests |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | ह्नि | स्त | स्य | ज | ला | य | ते | ज | ल | नि | धिः | कु | ल्या | य | ते | त | त्क्ष | णा |
| न्मे | रुः | स्व | ल्प | शि | ला | य | ते | मृ | ग | प | तिः | स | द्यः | कु | र | ङ्गा | य | ते |
| व्या | लो | मा | ल्य | गु | णा | य | ते | वि | ष | र | सः | पी | यू | ष | व | र्षा | य | ते |
| य | स्या | ङ्गे | ऽखि | ल | लो | क | व | ल्ल | भ | त | मं | शी | लं | स | मु | न्मी | ल | ति |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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