अन्वयः
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एकेन अपि हि स्फार-स्फुरित-तेजसा शूरेण मही-तलम् पाद-आक्रान्तम् क्रियते, भास्करेण एव (यथा) ।
Summary
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The surface of the earth is occupied by even a single hero whose brilliance is vast and radiant, just as it is by the sun.
सारांश
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जैसे अकेला सूर्य अपने प्रचंड तेज से संपूर्ण आकाश को व्याप्त कर लेता है, वैसे ही एक शूरवीर पुरुष अपने पराक्रम से पूरी पृथ्वी को अपने वश में कर सकता है।
पदच्छेदः
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| एकेन | एक (३.१) | by one |
| अपि | अपि | even |
| हि | हि | indeed |
| शूरेण | शूर (३.१) | by a hero |
| पाद-आक्रान्तम् | पाद–आक्रान्त (आ√क्रम्+क्त, १.१) | occupied by foot |
| मही-तलम् | मही–तल (१.१) | the surface of the earth |
| क्रियते | क्रियते (√कृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is made |
| भास्करेण | भास्कर (३.१) | by the sun |
| एव | एव | just as |
| स्फार-स्फुरित-तेजसा | स्फार–स्फुरित–तेजस् (३.१) | by one with vast and radiant brilliance |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | के | ना | पि | हि | शू | रे | ण |
| पा | दा | क्रा | न्तं | म | ही | त | लम् |
| क्रि | य | ते | भा | स्क | रे | णै | व |
| स्फा | र | स्फु | रि | त | ते | ज | सा |
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