कदर्थितस्यापि हि धैर्यवृत्ते-
र्न शक्यते धैर्यगुणः प्रमार्ष्टुम् ।
अधोमुखस्यापि कृतस्य वह्नेर्-
नाधः शिखा याति कदाचिदेव ॥

अन्वयः AI कदर्थितस्य अपि हि धैर्य-वृत्तेः (नरस्य) धैर्य-गुणः प्रमार्ष्टुम् न शक्यते । अधोमुखस्य कृतस्य अपि वह्नेः शिखा कदाचित् एव अधः न याति ।
Summary AI Even when greatly afflicted, the quality of fortitude of a steadfast person cannot be wiped away. Just as the flame of a fire, even when it is made to face downwards, never goes down.
सारांश AI धैर्यवान व्यक्ति को कितना भी प्रताड़ित किया जाए, उसके धैर्य के गुण को नष्ट नहीं किया जा सकता, जैसे अग्नि की लौ को चाहे नीचे की ओर झुका दिया जाए, वह सदा ऊपर की ओर ही उठती है।
पदच्छेदः AI
कदर्थितस्यकदर्थित (√अर्थ्+णिच्+क्त, ६.१) of one who is afflicted
अपिअपि even
हिहि indeed
धैर्य-वृत्तेःधैर्यवृत्ति (६.१) of one with a steadfast nature
not
शक्यतेशक्यते (√शक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is it possible
धैर्य-गुणःधैर्यगुण (१.१) the quality of fortitude
प्रमार्ष्टुम्प्रमार्ष्टुम् (प्र√मृज्+तुमुन्) to wipe away
अधोमुखस्यअधोमुख (६.१) of that which is made to face downwards
अपिअपि even
कृतस्यकृत (√कृ+क्त, ६.१) of that which is made
वह्नेःवह्नि (६.१) of a fire
not
अधःअधस् downwards
शिखाशिखा (१.१) the flame
यातियाति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) goes
कदाचित्कदाचित् ever
एवएव indeed
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
र्थि स्या पि हि धै र्य वृ त्ते
र्न क्य ते धै र्य गु णः प्र मा र्ष्टु
धो मु स्या पि कृ स्य ह्ने
र्ना धः शि खा या ति दा चि दे
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