सुतनु हृदयात्प्रत्यादेशव्यलीकमपैतु ते
किमपि मनसः संमोहो मे तदा बलवानभूत् ।
प्रबलतमसामेवं प्रायाः शुभेषु हि वृत्तयः
स्रजमपि शिरस्यन्धः क्षिप्तां धुनोत्यहिशङ्कया ॥
सुतनु हृदयात्प्रत्यादेशव्यलीकमपैतु ते
किमपि मनसः संमोहो मे तदा बलवानभूत् ।
प्रबलतमसामेवं प्रायाः शुभेषु हि वृत्तयः
स्रजमपि शिरस्यन्धः क्षिप्तां धुनोत्यहिशङ्कया ॥
किमपि मनसः संमोहो मे तदा बलवानभूत् ।
प्रबलतमसामेवं प्रायाः शुभेषु हि वृत्तयः
स्रजमपि शिरस्यन्धः क्षिप्तां धुनोत्यहिशङ्कया ॥
अन्वयः
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सुतनु, ते हृदयात् प्रत्यादेश-व्यलीकम् अपैतु । तदा मे मनसः किम् अपि सम्मोहः बलवान् अभूत् । हि प्रबल-तमसाम् शुभेषु वृत्तयः एवम्-प्रायाः (भवन्ति) । अन्धः शिरसि क्षिप्ताम् स्रजम् अपि अहि-शङ्कया धुनोति ।
Summary
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O slender one, let the pain of repudiation depart from your heart. At that time, some powerful delusion of my mind existed. For the behaviors of those overpowered by darkness are of such a nature in auspicious matters. A blind man shakes off even a garland placed on his head, fearing it to be a snake.
पदच्छेदः
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| सुतनु | सुतनु (८.१) | O slender-bodied one |
| हृदयात् | हृदय (५.१) | from the heart |
| प्रत्यादेश | प्रत्यादेश | undefined |
| व्यलीकम् | व्यलीक (१.१) | the pain of repudiation |
| अपैतु | अपैतु (अप√इ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it depart |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| किम् | किम् | undefined |
| अपि | अपि | undefined |
| मनसः | मनस् (६.१) | of the mind |
| संमोहः | संमोह (१.१) | some delusion |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| तदा | तदा | then |
| बलवान् | बलवत् (१.१) | powerful |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| प्रबल | प्रबल | undefined |
| तमसाम् | तमस् (६.३) | of those overpowered by darkness |
| एवम् | एवम् | undefined |
| प्रायाः | प्राय (१.३) | are of such a nature |
| शुभेषु | शुभ (७.३) | in auspicious matters |
| हि | हि | for |
| वृत्तयः | वृत्ति (१.३) | the behaviors |
| स्रजम् | स्रज् (२.१) | a garland |
| अपि | अपि | even |
| शिरसि | शिरस् (७.१) | on the head |
| अन्धः | अन्ध (१.१) | a blind man |
| क्षिप्ताम् | क्षिप्त (√क्षिप्+क्त, २.१) | placed |
| धुनोति | धुनोति (√धू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shakes off |
| अहि | अहि | undefined |
| शङ्कया | शङ्का (३.१) | with the fear of a snake |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | त | नु | हृ | द | या | त्प्र | त्या | दे | श | व्य | ली | क | म | पै | तु | ते |
| कि | म | पि | म | न | सः | सं | मो | हो | मे | त | दा | ब | ल | वा | न | भूत् |
| प्र | ब | ल | त | म | सा | मे | वं | प्रा | याः | शु | भे | षु | हि | वृ | त्त | यः |
| स्र | ज | म | पि | शि | र | स्य | न्धः | क्षि | प्तां | धु | नो | त्य | हि | श | ङ्क | या |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
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