प्राणानामनिलेन वृत्तिरुचिता सत्कल्पवृक्षे वने
तोये काञ्चनपद्मरेणुकपिशे धर्माभिषेकक्रिया ।
ध्यानं रत्नशिलातलेषु विबुधस्त्रीसंनिधौ संयमो
यत्काङ्क्षन्ति तपोभिरन्यमुनयस्तस्मिंस्तपस्यन्त्यमी ॥
प्राणानामनिलेन वृत्तिरुचिता सत्कल्पवृक्षे वने
तोये काञ्चनपद्मरेणुकपिशे धर्माभिषेकक्रिया ।
ध्यानं रत्नशिलातलेषु विबुधस्त्रीसंनिधौ संयमो
यत्काङ्क्षन्ति तपोभिरन्यमुनयस्तस्मिंस्तपस्यन्त्यमी ॥
तोये काञ्चनपद्मरेणुकपिशे धर्माभिषेकक्रिया ।
ध्यानं रत्नशिलातलेषु विबुधस्त्रीसंनिधौ संयमो
यत्काङ्क्षन्ति तपोभिरन्यमुनयस्तस्मिंस्तपस्यन्त्यमी ॥
अन्वयः
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अत्र सत् कल्पवृक्षे वने अनिलेन प्राणानाम् उचिता वृत्तिः अस्ति । काञ्चनपद्मरेणुकपिशे तोये धर्म अभिषेक क्रिया अस्ति । रत्नशिलातलेषु ध्यानम् अस्ति । विबुधस्त्रीसंनिधौ संयमः अस्ति । अन्यमुनयः तपोभिः यत् काङ्क्षन्ति, तत् सर्वम् सिद्धम् एव अस्ति, तथापि अमी तस्मिन् स्थाने तपस्यन्ति ।
Summary
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Here, they subsist on air in a forest of wish-fulfilling trees, perform ablutions in water tawny with golden lotus pollen, meditate on jeweled slabs, and practice self-control among celestial women. These sages perform penance in a place where they already possess what other sages strive for through austerities.
पदच्छेदः
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| प्राणानाम् | प्राण (६.३) | of life-breaths |
| अनिलेन | अनिल (३.१) | on air |
| वृत्तिः | वृत्ति (१.१) | subsistence |
| उचिता | उचित (१.१) | is proper |
| सत्कल्पवृक्षे | सत्–कल्पवृक्ष (७.१) | with excellent wish-fulfilling trees |
| वने | वन (७.१) | in the forest |
| तोये | तोय (७.१) | in water |
| काञ्चनपद्मरेणुकपिशे | काञ्चन–पद्म–रेणु–कपिश (७.१) | tawny with the pollen of golden lotuses |
| धर्माभिषेकक्रिया | धर्म–अभिषेक–क्रिया (१.१) | the act of religious ablution |
| ध्यानम् | ध्यान (१.१) | Meditation |
| रत्नशिलातलेषु | रत्न–शिला–तल (७.३) | on surfaces of jeweled rocks |
| विबुधस्त्रीसंनिधौ | विबुध–स्त्री–संनिधि (७.१) | in the presence of celestial women |
| संयमः | संयम (१.१) | self-control |
| यत् | यद् (२.१) | that which |
| काङ्क्षन्ति | काङ्क्षन्ति (√काङ्क्ष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | desire |
| तपोभिः | तपस् (३.३) | through austerities |
| अन्यमुनयः | अन्य–मुनि (१.३) | other sages |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that place |
| तपस्यन्ति | तपस्यन्ति (√तपस्य कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | perform penance |
| अमी | अदस् (१.३) | these sages |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | णा | ना | म | नि | ले | न | वृ | त्ति | रु | चि | ता | स | त्क | ल्प | वृ | क्षे | व | ने |
| तो | ये | का | ञ्च | न | प | द्म | रे | णु | क | पि | शे | ध | र्मा | भि | षे | क | क्रि | या |
| ध्या | नं | र | त्न | शि | ला | त | ले | षु | वि | बु | ध | स्त्री | सं | नि | धौ | सं | य | मो |
| य | त्का | ङ्क्ष | न्ति | त | पो | भि | र | न्य | मु | न | य | स्त | स्मिं | स्त | प | स्य | न्त्य | मी |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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