वल्मीकार्धनिमग्नमूर्तिरुरसा संदष्टसर्पत्वचा
कण्ठे जीर्णलताप्रतानवलयेनात्यर्थसंपीडितः ।
अंसव्यापि शकुन्तनीडनिचितं बिभ्रज्जटामण्डलम्
यत्र स्थाणुरिवाचलो मुनिरसावभ्यर्कबिम्बं स्थितः ॥
वल्मीकार्धनिमग्नमूर्तिरुरसा संदष्टसर्पत्वचा
कण्ठे जीर्णलताप्रतानवलयेनात्यर्थसंपीडितः ।
अंसव्यापि शकुन्तनीडनिचितं बिभ्रज्जटामण्डलम्
यत्र स्थाणुरिवाचलो मुनिरसावभ्यर्कबिम्बं स्थितः ॥
कण्ठे जीर्णलताप्रतानवलयेनात्यर्थसंपीडितः ।
अंसव्यापि शकुन्तनीडनिचितं बिभ्रज्जटामण्डलम्
यत्र स्थाणुरिवाचलो मुनिरसावभ्यर्कबिम्बं स्थितः ॥
अन्वयः
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यत्र असौ मुनिः वल्मीकार्धनिमग्नमूर्तिः, उरसा संदष्टसर्पत्वचा, कण्ठे जीर्णलताप्रतानवलयेन अत्यर्थम् संपीडितः, अंसव्यापि शकुन्तनीडनिचितम् जटामण्डलम् बिभ्रत्, स्थाणुः इव अचलः अभ्यर्कबिम्बम् स्थितः अस्ति ।
Summary
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Here stands this sage, immovable like a tree stump, facing the sun. His body is half-buried in an anthill, a snake's slough clings to his chest, his neck is tightly constricted by a withered creeper, and he bears a mass of matted hair covering his shoulders, filled with birds' nests.
पदच्छेदः
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| वल्मीकार्धनिमग्नमूर्तिः | वल्मीक–अर्ध–निमग्न–मूर्ति (१.१) | whose body is half-buried in an anthill |
| उरसा | उरस् (३.१) | on his chest |
| संदष्टसर्पत्वचा | संदष्ट–सर्प–त्वच् (३.१) | with a snake's slough clinging |
| कण्ठे | कण्ठ (७.१) | on his neck |
| जीर्णलताप्रतानवलयेन | जीर्ण–लता–प्रतान–वलय (३.१) | by the coil of a withered creeper's tendril |
| अत्यर्थम् | अत्यर्थम् | extremely |
| संपीडितः | संपीडित (सम्√पीड्+क्त, १.१) | constricted |
| अंसव्यापि | अंस–व्यापिन् (२.१) | covering the shoulders |
| शकुन्तनीडनिचितम् | शकुन्त–नीड–निचित (२.१) | filled with birds' nests |
| बिभ्रत् | बिभ्रत् (√भृ+शतृ, १.१) | bearing |
| जटामण्डलम् | जटा–मण्डल (२.१) | a mass of matted hair |
| यत्र | यत्र | where |
| स्थाणुः | स्थाणु (१.१) | a tree stump |
| इव | इव | like |
| अचलः | अचल (१.१) | immovable |
| मुनिः | मुनि (१.१) | the sage |
| असौ | अदस् (१.१) | this |
| अभ्यर्कबिम्बम् | अभ्यर्कबिम्बम् | facing the sun's orb |
| स्थितः | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | stands |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | ल्मी | का | र्ध | नि | म | ग्न | मू | र्ति | रु | र | सा | सं | द | ष्ट | स | र्प | त्व | चा |
| क | ण्ठे | जी | र्ण | ल | ता | प्र | ता | न | व | ल | ये | ना | त्य | र्थ | सं | पी | डि | तः |
| अं | स | व्या | पि | श | कु | न्त | नी | ड | नि | चि | तं | बि | भ्र | ज्ज | टा | म | ण्ड | ल |
| म्य | त्र | स्था | णु | रि | वा | च | लो | मु | नि | र | सा | व | भ्य | र्क | बि | म्बं | स्थि | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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