इतः प्रत्यादेशात्स्वजनमनुगन्तुं व्यवसिता
स्थिता तिष्ठ इत्युच्चैर्वदति गुरुशिष्ये गुरुसमे ।
पुनर्दृष्टिं बाष्पप्रसरकलुषामर्पितवती
मयि क्रूरे यत्तत्सविषमिव शल्यं दहति माम् ॥
इतः प्रत्यादेशात्स्वजनमनुगन्तुं व्यवसिता
स्थिता तिष्ठ इत्युच्चैर्वदति गुरुशिष्ये गुरुसमे ।
पुनर्दृष्टिं बाष्पप्रसरकलुषामर्पितवती
मयि क्रूरे यत्तत्सविषमिव शल्यं दहति माम् ॥
स्थिता तिष्ठ इत्युच्चैर्वदति गुरुशिष्ये गुरुसमे ।
पुनर्दृष्टिं बाष्पप्रसरकलुषामर्पितवती
मयि क्रूरे यत्तत्सविषमिव शल्यं दहति माम् ॥
अन्वयः
AI
इतः प्रत्यादेशात् स्वजनम् अनुगन्तुम् व्यवसिता, गुरुसमे गुरुशिष्ये 'तिष्ठ' इति उच्चैः वदति (सति), स्थिता (सा), क्रूरे मयि बाष्पप्रसरकलुषाम् दृष्टिम् पुनः अर्पितवती यत्, तत् सविषम् शल्यम् इव माम् दहति ।
Summary
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After my rejection, she resolved to follow her kin, but stopped when the guru's disciple, equal to the guru, cried 'Stop!'. The memory of her then turning to cast a tear-filled glance at cruel me—that now burns me like a poisoned arrowhead.
पदच्छेदः
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| इतः | इतः | from here |
| प्रत्यादेशात् | प्रत्यादेश (५.१) | due to the rejection |
| स्वजनम् | स्वजन (२.१) | her own people |
| अनुगन्तुम् | अनुगन्तुम् (अनु√गम्+तुमुन्) | to follow |
| व्यवसिता | व्यवसित (वि+अव√सो+क्त, १.१) | resolved |
| स्थिता | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | she stopped |
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | Stop! |
| इति | इति | thus |
| उच्चैः | उच्चैस् | loudly |
| वदति | वदत् (√वद्+शतृ, ७.१) | while speaking |
| गुरुशिष्ये | गुरुशिष्य (७.१) | the guru's disciple |
| गुरुसमे | गुरुसम (७.१) | who was like the guru |
| पुनः | पुनर् | again |
| दृष्टिम् | दृष्टि (२.१) | a glance |
| बाष्पप्रसरकलुषाम् | बाष्प–प्रसर–कलुष (२.१) | clouded by the flow of tears |
| अर्पितवती | अर्पितवत् (√ऋ+णिच्+क्तवतु, १.१) | she cast |
| मयि | अस्मद् (७.१) | on me |
| क्रूरे | क्रूर (७.१) | the cruel one |
| यत् | यद् (१.१) | the fact that |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| सविषम् | सविष (२.१) | poisoned |
| इव | इव | like |
| शल्यम् | शल्य (२.१) | an arrow-head |
| दहति | दहति (√दह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | burns |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | तः | प्र | त्या | दे | शा | त्स्व | ज | न | म | नु | ग | न्तुं | व्य | व | सि | ता | |
| स्थि | ता | ति | ष्ठ | इ | त्यु | च्चै | र्व | द | ति | गु | रु | शि | ष्ये | गु | रु | स | मे |
| पु | न | र्दृ | ष्टिं | बा | ष्प | प्र | स | र | क | लु | षा | म | र्पि | त | व | ती | |
| म | यि | क्रू | रे | य | त्त | त्स | वि | ष | मि | व | श | ल्यं | द | ह | ति | माम् | |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | |||||||||||
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