चूतानां चिरनिर्गता अपि कलिका बध्नाति न स्वं रजः
संनद्धं यदपि स्थितं कुरबकं तत्कोरकावस्थया ।
कण्ठेषु स्खलितं गतेऽपि शिशिरे पुंस्कोकिलानां रुतम्
शङ्के संहरति स्मरोऽपि चकितस्तूणार्धकृष्टं शरम् ॥
चूतानां चिरनिर्गता अपि कलिका बध्नाति न स्वं रजः
संनद्धं यदपि स्थितं कुरबकं तत्कोरकावस्थया ।
कण्ठेषु स्खलितं गतेऽपि शिशिरे पुंस्कोकिलानां रुतम्
शङ्के संहरति स्मरोऽपि चकितस्तूणार्धकृष्टं शरम् ॥
संनद्धं यदपि स्थितं कुरबकं तत्कोरकावस्थया ।
कण्ठेषु स्खलितं गतेऽपि शिशिरे पुंस्कोकिलानां रुतम्
शङ्के संहरति स्मरोऽपि चकितस्तूणार्धकृष्टं शरम् ॥
अन्वयः
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चूतानाम् चिरनिर्गता अपि कलिका स्वम् रजः न बध्नाति । यत् कुरबकम् संनद्धम् अपि स्थितम्, तत् कोरकावस्थया (स्थितम्) । शिशिरे गते अपि पुंस्कोकिलानाम् रुतम् कण्ठेषु स्खलितम् । शङ्के, चकितः स्मरः अपि तूणार्धकृष्टम् शरम् संहरति ।
Summary
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The mango bud, though long emerged, forms no pollen. The Kurabaka, though ready, remains a bud. Even with winter gone, the cuckoos' song falters in their throats. I suspect that even Kama, startled by my sorrow, withdraws the arrow half-drawn from his quiver.
पदच्छेदः
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| चूतानाम् | चूत (६.३) | of the mango trees |
| चिरनिर्गता | चिर–निर्गत (निर्√गम्+क्त, १.१) | long emerged |
| अपि | अपि | even |
| कलिका | कलिका (१.१) | the bud |
| बध्नाति | बध्नाति (√बन्ध् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | forms |
| न | न | not |
| स्वम् | स्व (२.१) | its own |
| रजः | रजस् (२.१) | pollen |
| संनद्धम् | संनद्ध (सम्√नह्+क्त, १.१) | ready to bloom |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| अपि | अपि | although |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | is |
| कुरबकम् | कुरबक (१.१) | the Kurabaka flower |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| कोरकावस्थया | कोरक–अवस्था (३.१) | in the state of a bud |
| कण्ठेषु | कण्ठ (७.३) | in the throats |
| स्खलितम् | स्खलित (√स्खल्+क्त, १.१) | faltering |
| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | having passed |
| अपि | अपि | even though |
| शिशिरे | शिशिर (७.१) | the cool season |
| पुंस्कोकिलानाम् | पुंस्कोकिल (६.३) | of the male cuckoos |
| रुतम् | रुत (१.१) | the song |
| शङ्के | शङ्के (√शङ्क् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I suspect |
| संहरति | संहरति (सम्√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | withdraws |
| स्मरः | स्मर (१.१) | Kama |
| अपि | अपि | even |
| चकितः | चकित (√चक्+क्त, १.१) | startled |
| तूणार्धकृष्टम् | तूण–अर्ध–कृष्ट (√कृष्+क्त, २.१) | half-drawn from the quiver |
| शरम् | शर (२.१) | arrow |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चू | ता | नां | चि | र | नि | र्ग | ता | अ | पि | क | लि | का | ब | ध्ना | ति | न | स्वं | र | जः |
| सं | न | द्धं | य | द | पि | स्थि | तं | कु | र | ब | कं | त | त्को | र | का | व | स्थ | या | |
| क | ण्ठे | षु | स्ख | लि | तं | ग | ते | ऽपि | शि | शि | रे | पुं | स्को | कि | ला | नां | रु | त | |
| म्श | ङ्के | सं | ह | र | ति | स्म | रो | ऽपि | च | कि | त | स्तू | णा | र्ध | कृ | ष्टं | श | रम् | |
| म | स | ज | स | त | त | ग | |||||||||||||
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