अहन्यहन्यात्मन एव ताव-
ज्ज्ञातुं प्रमादस्खलितं न शक्यम् ।
प्रजासु कः के पथा प्रयाति
इत्यशेषतो वेदितुमस्ति शक्तिः ॥
अहन्यहन्यात्मन एव ताव-
ज्ज्ञातुं प्रमादस्खलितं न शक्यम् ।
प्रजासु कः के पथा प्रयाति
इत्यशेषतो वेदितुमस्ति शक्तिः ॥
ज्ज्ञातुं प्रमादस्खलितं न शक्यम् ।
प्रजासु कः के पथा प्रयाति
इत्यशेषतो वेदितुमस्ति शक्तिः ॥
अन्वयः
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तावत् अहनि अहनि आत्मनः एव प्रमादस्खलितम् ज्ञातुम् न शक्यम् । प्रजासु कः केन पथा प्रयाति इति अशेषतः वेदितुम् शक्तिः अस्ति किम्?
Summary
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It is not possible to know even one's own daily lapses due to negligence. How then is there the ability to know completely who among the subjects is treading which path?
पदच्छेदः
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| अहनि | अहन् (७.१) | day |
| अहनि | अहन् (७.१) | by day |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | one's own |
| एव | एव | even |
| तावत् | तावत् | firstly |
| ज्ञातुम् | ज्ञातुम् (√ज्ञा+तुमुन्) | to know |
| प्रमादस्खलितम् | प्रमाद–स्खलित (२.१) | a lapse due to negligence |
| न | न | not |
| शक्यम् | शक्य (√शक्+यत्, १.१) | is possible |
| प्रजासु | प्रजा (७.३) | Among the subjects |
| कः | किम् (१.१) | who |
| केन | किम् (३.१) | by which |
| पथा | पथिन् (३.१) | path |
| प्रयाति | प्रयाति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes |
| इति | इति | thus |
| अशेषतः | अशेषतः | completely |
| वेदितुम् | वेदितुम् (√विद्+तुमुन्) | to know |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is there |
| शक्तिः | शक्ति (१.१) | the ability |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ह | न्य | ह | न्या | त्म | न | ए | व | ता | व |
| ज्ज्ञा | तुं | प्र | मा | द | स्ख | लि | तं | न | श | क्यम् |
| प्र | जा | सु | कः | के | प | था | प्र | या | ति | इ |
| त्य | शे | ष | तो | वे | दि | तु | म | स्ति | श | क्तिः |
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