संरोपितेऽप्यात्मनि धर्मपत्नी
त्यक्ता मया नाम कुलप्रतिष्ठा ।
कल्पिष्यमाणा महते फलाय
वसुंधरा काल इवोप्तबीजा ॥
संरोपितेऽप्यात्मनि धर्मपत्नी
त्यक्ता मया नाम कुलप्रतिष्ठा ।
कल्पिष्यमाणा महते फलाय
वसुंधरा काल इवोप्तबीजा ॥
त्यक्ता मया नाम कुलप्रतिष्ठा ।
कल्पिष्यमाणा महते फलाय
वसुंधरा काल इवोप्तबीजा ॥
अन्वयः
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आत्मनि संरोपिते अपि कुलप्रतिष्ठा धर्मपत्नी मया त्यक्ता नाम । सा महते फलाय कल्पिष्यमाणा, काले उप्तबीजा वसुंधरा इव अस्ति ।
Summary
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Alas, I have abandoned my lawful wife, the very honor of my family, in whom my lineage was planted. She was destined for a great outcome, like the earth with seeds sown at the proper time.
पदच्छेदः
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| संरोपिते | संरोपित (सम्√रुह्+णिच्+क्त, ७.१) | having been planted |
| अपि | अपि | even though |
| आत्मनि | आत्मन् (७.१) | in myself (my lineage) |
| धर्मपत्नी | धर्मपत्नी (१.१) | lawful wife |
| त्यक्ता | त्यक्त (√त्यज्+क्त, १.१) | was abandoned |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| नाम | नाम | alas |
| कुलप्रतिष्ठा | कुल–प्रतिष्ठा (१.१) | the honor of the family |
| कल्पिष्यमाणा | कल्पिष्यमाण (√कॢप्+स्य+शानच्, १.१) | being destined |
| महते | महत् (४.१) | for a great |
| फलाय | फल (४.१) | fruit |
| वसुंधरा | वसुंधरा (१.१) | the earth |
| काले | काल (७.१) | in season |
| इव | इव | like |
| उप्तबीजा | उप्त (√वप्)–बीज (१.१) | with seed sown |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | रो | पि | ते | ऽप्या | त्म | नि | ध | र्म | प | त्नी |
| त्य | क्ता | म | या | ना | म | कु | ल | प्र | ति | ष्ठा |
| क | ल्पि | ष्य | मा | णा | म | ह | ते | फ | ला | य |
| व | सुं | ध | रा | का | ल | इ | वो | प्त | बी | जा |
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