कृतं न कर्णार्पितबन्धनं सखे
शिरीषमागण्डविलम्बिकेसरम् ।
न वा शरच्चन्द्रमरीचिकोमलं
मृणालसूत्रं रचितं स्तनान्तरे ॥
कृतं न कर्णार्पितबन्धनं सखे
शिरीषमागण्डविलम्बिकेसरम् ।
न वा शरच्चन्द्रमरीचिकोमलं
मृणालसूत्रं रचितं स्तनान्तरे ॥
शिरीषमागण्डविलम्बिकेसरम् ।
न वा शरच्चन्द्रमरीचिकोमलं
मृणालसूत्रं रचितं स्तनान्तरे ॥
अन्वयः
AI
सखे, आगण्डविलम्बिकेसरम् शिरीषम् कर्णार्पितबन्धनम् न कृतम् । वा शरच्चन्द्रमरीचिकोमलम् मृणालसूत्रम् स्तनान्तरे न रचितम् ।
Summary
AI
Friend, I forgot to draw the Shirisha flower tucked behind her ear, its filaments dangling to her cheek. Nor did I draw the lotus-fibre necklace, as delicate as the autumn moon's rays, resting between her breasts.
पदच्छेदः
AI
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | made |
| न | न | not |
| कर्णार्पितबन्धनम् | कर्ण–अर्पित (√ऋ+णिच्+क्त)–बन्धन (१.१) | with its stalk placed on her ear |
| सखे | सखि (८.१) | O friend |
| शिरीषम् | शिरीष (१.१) | the Shirisha flower |
| आगण्डविलम्बिकेसरम् | आगण्ड–विलम्बिन् (वि√लम्ब्)–केसर (१.१) | with filaments hanging to the cheek |
| न | न | not |
| वा | वा | and |
| शरच्चन्द्रमरीचिकोमलम् | शरद्–चन्द्र–मरीचि–कोमल (१.१) | delicate as the rays of the autumn moon |
| मृणालसूत्रम् | मृणालसूत्र (१.१) | a necklace of lotus-fibre |
| रचितम् | रचित (√रच्+क्त, १.१) | drawn |
| स्तनान्तरे | स्तनान्तर (७.१) | between the breasts |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | तं | न | क | र्णा | र्पि | त | ब | न्ध | नं | स | खे |
| शि | री | ष | मा | ग | ण्ड | वि | ल | म्बि | के | स | रम् |
| न | वा | श | र | च्च | न्द्र | म | री | चि | को | म | लं |
| मृ | णा | ल | सू | त्रं | र | चि | तं | स्त | ना | न्त | रे |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.