कार्या सैकतलीनहंसमिथुना स्रोतोवहा मालिनी
पातास्तामभितो निषण्णहरिणा गौरीगुरोः पावनाः ।
शाखालम्बितवल्कलस्य च तरोर्निर्मातुमिच्छाम्यधः
शृङ्गे कृष्णमृगस्य वामनयनं कण्डूयमानां मृगीम् ॥
कार्या सैकतलीनहंसमिथुना स्रोतोवहा मालिनी
पातास्तामभितो निषण्णहरिणा गौरीगुरोः पावनाः ।
शाखालम्बितवल्कलस्य च तरोर्निर्मातुमिच्छाम्यधः
शृङ्गे कृष्णमृगस्य वामनयनं कण्डूयमानां मृगीम् ॥
पातास्तामभितो निषण्णहरिणा गौरीगुरोः पावनाः ।
शाखालम्बितवल्कलस्य च तरोर्निर्मातुमिच्छाम्यधः
शृङ्गे कृष्णमृगस्य वामनयनं कण्डूयमानां मृगीम् ॥
अन्वयः
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स्रोतोवहा मालिनी सैकतलीनहंसमिथुना कार्या । ताम् अभितः गौरीगुरोः पावनाः पादाः निषण्णहरिणाः (कार्याः) । च शाखालम्बितवल्कलस्य तरोः अधः कृष्णमृगस्य शृङ्गे वामनयनम् कण्डूयमानाम् मृगीम् निर्मातुम् इच्छामि ।
Summary
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The river Malini should be drawn with pairs of swans on its banks. On both sides, the sacred foothills of the Himalayas with deer resting. And beneath a tree with bark-garments on its branches, I want to draw a doe scratching her left eye on the horn of a black antelope.
पदच्छेदः
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| कार्या | कार्य (√कृ+यत्, १.१) | should be made |
| सैकतलीनहंसमिथुना | सैकत–लीन (√ली+क्त)–हंसमिथुन (१.१) | with pairs of swans resting on its sandbanks |
| स्रोतोवहा | स्रोतोवहा (१.१) | the river |
| मालिनी | मालिनी (१.१) | Malini |
| पादाः | पाद (१.३) | the foothills |
| ताम् | तद् (२.१) | it |
| अभितः | अभितः | on both sides |
| निषण्णहरिणाः | निषण्ण (नि√सद्+क्त)–हरिण (१.३) | with deer seated |
| गौरीगुरोः | गौरी–गुरु (६.१) | of the Himalaya (Gauri's father) |
| पावनाः | पावन (१.३) | sacred |
| शाखालम्बितवल्कलस्य | शाखा–आलम्बित (आ√लम्ब्+क्त)–वल्कल (६.१) | of the tree with bark-garments hanging from its branches |
| च | च | and |
| तरोः | तरु (६.१) | of a tree |
| निर्मातुम् | निर्मातुम् (निर्√मा+तुमुन्) | to draw |
| इच्छामि | इच्छामि (√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I wish |
| अधः | अधस् | beneath |
| शृङ्गे | शृङ्ग (७.१) | on the horn |
| कृष्णमृगस्य | कृष्णमृग (६.१) | of a black antelope |
| वामनयनम् | वामनयन (२.१) | her left eye |
| कण्डूयमानाम् | कण्डूयमान (√कण्डूय+शानच्, २.१) | a doe scratching |
| मृगीम् | मृगी (२.१) | a doe |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | र्या | सै | क | त | ली | न | हं | स | मि | थु | ना | स्रो | तो | व | हा | मा | लि | नी |
| पा | ता | स्ता | म | भि | तो | नि | ष | ण्ण | ह | रि | णा | गौ | री | गु | रोः | पा | व | नाः |
| शा | खा | ल | म्बि | त | व | ल्क | ल | स्य | च | त | रो | र्नि | र्मा | तु | मि | च्छा | म्य | धः |
| शृ | ङ्गे | कृ | ष्ण | मृ | ग | स्य | वा | म | न | य | नं | क | ण्डू | य | मा | नां | मृ | गीम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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