आचार इत्यवहितेन मया गृहीता
या वेत्रयष्टिरवरोधगृहेषु राज्ञः ।
काले गते बहुतिथे मम सैव जाता
प्रस्थानविक्लवगतेरवलम्बनार्था ॥
आचार इत्यवहितेन मया गृहीता
या वेत्रयष्टिरवरोधगृहेषु राज्ञः ।
काले गते बहुतिथे मम सैव जाता
प्रस्थानविक्लवगतेरवलम्बनार्था ॥
या वेत्रयष्टिरवरोधगृहेषु राज्ञः ।
काले गते बहुतिथे मम सैव जाता
प्रस्थानविक्लवगतेरवलम्बनार्था ॥
अन्वयः
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राज्ञः अवरोधगृहेषु आचारः इति अवहितेन मया या वेत्रयष्टिः गृहीता, बहुतिथे काले गते (सति) सा एव मम प्रस्थानविक्लवगतेः अवलम्बनार्था जाता ।
Summary
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The cane staff that I, being attentive, held in the king's inner apartments as a matter of duty, has now, after much time has passed, become a means of support for my faltering steps at the time of departure.
पदच्छेदः
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| आचारः | आचार (१.१) | as a custom |
| इति | इति | thus |
| अवहितेन | अवहित (अव√धा+क्त, ३.१) | by the attentive |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| गृहीता | गृहीत (√ग्रह्+क्त, १.१) | was held |
| या | यद् (१.१) | which |
| वेत्रयष्टिः | वेत्र–यष्टि (१.१) | cane staff |
| अवरोधगृहेषु | अवरोध–गृह (७.३) | in the inner apartments |
| राज्ञः | राजन् (६.१) | of the king |
| काले | काल (७.१) | time |
| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | having passed |
| बहुतिथे | बहुतिथ (७.१) | much |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| सा | तद् (१.१) | that same |
| एव | एव | very |
| जाता | जात (√जन्+क्त, १.१) | has become |
| प्रस्थानविक्लवगतेः | प्रस्थान–विक्लव–गति (६.१) | for my gait faltering at departure |
| अवलम्बनार्था | अवलम्बन–अर्थ (१.१) | for the purpose of support |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | चा | र | इ | त्य | व | हि | ते | न | म | या | गृ | ही | ता |
| या | वे | त्र | य | ष्टि | र | व | रो | ध | गृ | हे | षु | रा | ज्ञः |
| का | ले | ग | ते | ब | हु | ति | थे | म | म | सै | व | जा | ता |
| प्र | स्था | न | वि | क्ल | व | ग | ते | र | व | ल | म्ब | ना | र्था |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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