मय्येव विस्मरणदारुणचित्तवृत्तौ
वृत्तं रहः प्रणयमप्रतिपद्यमाने ।
भेदाद्भ्रुवोः कुटिलयोरतिलोहिताक्ष्या
भग्नं शरासनमिवातिरुषा स्मरस्य ॥
मय्येव विस्मरणदारुणचित्तवृत्तौ
वृत्तं रहः प्रणयमप्रतिपद्यमाने ।
भेदाद्भ्रुवोः कुटिलयोरतिलोहिताक्ष्या
भग्नं शरासनमिवातिरुषा स्मरस्य ॥
वृत्तं रहः प्रणयमप्रतिपद्यमाने ।
भेदाद्भ्रुवोः कुटिलयोरतिलोहिताक्ष्या
भग्नं शरासनमिवातिरुषा स्मरस्य ॥
अन्वयः
AI
विस्मरणदारुणचित्तवृत्तौ मयि एव रहः वृत्तं प्रणयम् अप्रतिपद्यमाने (सति), अतिरुषा अतिलोहिताक्ष्याः कुटिलयोः भ्रुवोः भेदात् स्मरस्य शरासनं भग्नम् इव (आसीत्) ।
Summary
AI
As I, whose mind was cruel with forgetfulness, failed to acknowledge our secret love, her arched eyebrows, with her eyes extremely red from great anger, seemed like the bow of the God of Love, broken in fury.
पदच्छेदः
AI
| मयि | अस्मद् (७.१) | As I |
| एव | एव | indeed |
| विस्मरणदारुणचित्तवृत्तौ | विस्मरण–दारुण–चित्तवृत्ति (७.१) | whose mind was cruel with forgetfulness |
| वृत्तम् | वृत्त (√वृत्+क्त, २.१) | that occurred |
| रहः | रहस् | in secret |
| प्रणयम् | प्रणय (२.१) | love |
| अप्रतिपद्यमाने | अप्रतिपद्यमान (प्रति√पद्+शानच्, ७.१) | failed to acknowledge |
| भेदात् | भेद (५.१) | from the arching |
| भ्रुवोः | भ्रू (६.२) | of her two eyebrows |
| कुटिलयोः | कुटिल (६.२) | curved |
| अतिलोहिताक्ष्याः | अतिलोहित–अक्षि (६.१) | of her whose eyes were extremely red |
| भग्नम् | भग्न (√भञ्ज्+क्त, १.१) | broken |
| शरासनम् | शरासन (१.१) | the bow |
| इव | इव | as if |
| अतिरुषा | अतिरुष् (३.१) | with great anger |
| स्मरस्य | स्मर (६.१) | of the God of Love |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | य्ये | व | वि | स्म | र | ण | दा | रु | ण | चि | त्त | वृ | त्तौ |
| वृ | त्तं | र | हः | प्र | ण | य | म | प्र | ति | प | द्य | मा | ने |
| भे | दा | द्भ्रु | वोः | कु | टि | ल | यो | र | ति | लो | हि | ता | क्ष्या |
| भ | ग्नं | श | रा | स | न | मि | वा | ति | रु | षा | स्म | र | स्य |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.