भवन्ति नंरास्तरवः फलागमै-
र्नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः ।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः
स्वभाव एवैष परोपकारिणाम् ॥
भवन्ति नंरास्तरवः फलागमै-
र्नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः ।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः
स्वभाव एवैष परोपकारिणाम् ॥
र्नवाम्बुभिर्दूरविलम्बिनो घनाः ।
अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः
स्वभाव एवैष परोपकारिणाम् ॥
अन्वयः
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तरवः फलागमैः नम्राः भवन्ति । घनाः नवाम्बुभिः दूरविलम्बिनः (भवन्ति) । सत्पुरुषाः समृद्धिभिः अनुद्धताः (भवन्ति) । एषः परोपकारिणां स्वभावः एव ।
Summary
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Trees bend down with the arrival of fruit; clouds hang low, heavy with fresh water; noble men are not arrogant with prosperity. This is the very nature of those who help others.
पदच्छेदः
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| भवन्ति | भवन्ति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | become |
| नम्राः | नम्र (१.३) | bent |
| तरवः | तरु (१.३) | Trees |
| फलागमैः | फल–आगम (३.३) | with the arrival of fruits |
| नवाम्बुभिः | नव–अम्बु (३.३) | with fresh water |
| दूरविलम्बिनः | दूर–विलम्बिन् (१.३) | hang low |
| घनाः | घन (१.३) | Clouds |
| अनुद्धताः | अनुद्धत (१.३) | not arrogant |
| सत्पुरुषाः | सत्–पुरुष (१.३) | Noble men |
| समृद्धिभिः | समृद्धि (३.३) | with prosperity |
| स्वभावः | स्वभाव (१.१) | the nature |
| एव | एव | very |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| परोपकारिणाम् | पर–उपकारिन् (६.३) | of those who help others |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | व | न्ति | नं | रा | स्त | र | वः | फ | ला | ग | मै |
| र्न | वा | म्बु | भि | र्दू | र | वि | ल | म्बि | नो | घ | नाः |
| अ | नु | द्ध | ताः | स | त्पु | रु | षाः | स | मृ | द्धि | भिः |
| स्व | भा | व | ए | वै | ष | प | रो | प | का | रि | णाम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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