अमी वेदिं परितः कॢप्तधिष्ण्याः
समिद्वन्तः प्रान्तसंस्तीर्णदर्भाः ।
अपघ्नन्तो दुरितं हव्यगन्धै-
र्वैतानास्त्वां बह्नयः पावयन्तु ॥
अमी वेदिं परितः कॢप्तधिष्ण्याः
समिद्वन्तः प्रान्तसंस्तीर्णदर्भाः ।
अपघ्नन्तो दुरितं हव्यगन्धै-
र्वैतानास्त्वां बह्नयः पावयन्तु ॥
समिद्वन्तः प्रान्तसंस्तीर्णदर्भाः ।
अपघ्नन्तो दुरितं हव्यगन्धै-
र्वैतानास्त्वां बह्नयः पावयन्तु ॥
अन्वयः
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वेदिम् परितः कॢप्तधिष्ण्याः समिद्वन्तः प्रान्तसंस्तीर्णदर्भाः हव्यगन्धैः दुरितम् अपघ्नन्तः अमी वैतानाः वह्नयः त्वाम् पावयन्तु।
Summary
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May these sacrificial fires, placed in their appointed spots around the altar, possessing sacred fuel, with Darbha grass strewn at their edges, and dispelling evil with the fragrance of oblations, purify you.
पदच्छेदः
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| अमी | अदस् (१.३) | these |
| वेदिम् | वेदि (२.१) | the altar |
| परितः | परितः | around |
| कॢप्तधिष्ण्याः | कॢप्त (√कॢप्+क्त)–धिष्ण्य (१.३) | with their places assigned |
| समिद्वन्तः | समिद्वत् (१.३) | possessing sacred fuel |
| प्रान्तसंस्तीर्णदर्भाः | प्रान्त–संस्तीर्ण (सम्√स्तॄ+क्त)–दर्भ (१.३) | with Darbha grass strewn at their edges |
| अपघ्नन्तः | अपघ्नत् (अप√हन्+शतृ, १.३) | destroying |
| दुरितम् | दुरित (२.१) | evil |
| हव्यगन्धैः | हव्य–गन्ध (३.३) | with the fragrance of oblations |
| वैतानाः | वैतान (१.३) | sacrificial |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| वह्नयः | वह्नि (१.३) | fires |
| पावयन्तु | पावयन्तु (√पू +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | may they purify |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | मी | वे | दिं | प | रि | तः | कॢ | प्त | धि | ष्ण्याः |
| स | मि | द्व | न्तः | प्रा | न्त | सं | स्ती | र्ण | द | र्भाः |
| अ | प | घ्न | न्तो | दु | रि | तं | ह | व्य | ग | न्धै |
| र्वै | ता | ना | स्त्वां | ब | ह्न | यः | पा | व | य | न्तु |
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