यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संस्पृष्टमुत्कण्ठया
कण्ठः स्तम्भितबाष्पवृत्तिकलुषश्चिन्ताजडं दर्शनम् ।
वैक्लव्यं मम तावदीदृशमिदं स्नेहादरण्यौकसः
पीड्यन्ते गृहिणः कथं नु तनयाविश्लेषदुःखैर्नवैः ॥
यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संस्पृष्टमुत्कण्ठया
कण्ठः स्तम्भितबाष्पवृत्तिकलुषश्चिन्ताजडं दर्शनम् ।
वैक्लव्यं मम तावदीदृशमिदं स्नेहादरण्यौकसः
पीड्यन्ते गृहिणः कथं नु तनयाविश्लेषदुःखैर्नवैः ॥
कण्ठः स्तम्भितबाष्पवृत्तिकलुषश्चिन्ताजडं दर्शनम् ।
वैक्लव्यं मम तावदीदृशमिदं स्नेहादरण्यौकसः
पीड्यन्ते गृहिणः कथं नु तनयाविश्लेषदुःखैर्नवैः ॥
अन्वयः
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'अद्य शकुन्तला यास्यति' इति (विचारेण) हृदयम् उत्कण्ठया संस्पृष्टम्। कण्ठः स्तम्भितबाष्पवृत्तिकलुषः। दर्शनम् चिन्ताजडम्। अरण्यौकसः मम तावत् स्नेहात् ईदृशम् इदम् वैक्लव्यम् (अस्ति)। गृहिणः नवैः तनयाविश्लेषदुःखैः कथम् नु न पीड्यन्ते।
Summary
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"Shakuntala will leave today"—at this thought, my heart is filled with longing. My throat is choked with suppressed tears, my sight is paralyzed by worry. If this is the distress of a forest-dweller like me due to affection, how much more must householders be tormented by the fresh sorrows of separation from a daughter?
पदच्छेदः
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| यास्यति | यास्यति (√या कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will go |
| अद्य | अद्य | today |
| शकुन्तला | शकुन्तला (१.१) | Shakuntala |
| इति | इति | thus |
| हृदयम् | हृदय (१.१) | my heart |
| संस्पृष्टम् | संस्पृष्ट (सम्√स्पृश्+क्त, १.१) | is touched |
| उत्कण्ठया | उत्कण्ठा (३.१) | with longing |
| कण्ठः | कण्ठ (१.१) | my throat |
| स्तम्भितबाष्पवृत्तिकलुषः | स्तम्भित (√स्तम्भ्)–बाष्प–वृत्ति–कलुष (१.१) | is choked by the suppression of tears |
| चिन्ताजडम् | चिन्ता–जड (१.१) | paralyzed by worry |
| दर्शनम् | दर्शन (१.१) | my sight |
| वैक्लव्यम् | वैक्लव्य (१.१) | distress |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| तावत् | तावत् | so much |
| ईदृशम् | ईदृश (१.१) | such |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| स्नेहात् | स्नेह (५.१) | from affection |
| अरण्यौकसः | अरण्यौकस् (६.१) | of a forest-dweller |
| पीड्यन्ते | पीड्यन्ते (√पीड् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are tormented |
| गृहिणः | गृहिन् (१.३) | householders |
| कथम् | कथम् | how |
| नु | नु | indeed |
| तनयाविश्लेषदुःखैः | तनया–विश्लेष–दुःख (३.३) | by the sorrows of separation from a daughter |
| नवैः | नव (३.३) | fresh |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | स्य | त्य | द्य | श | कु | न्त | ले | ति | हृ | द | यं | सं | स्पृ | ष्ट | मु | त्क | ण्ठ | या |
| क | ण्ठः | स्त | म्भि | त | बा | ष्प | वृ | त्ति | क | लु | ष | श्चि | न्ता | ज | डं | द | र्श | नम् |
| वै | क्ल | व्यं | म | म | ता | व | दी | दृ | श | मि | दं | स्ने | हा | द | र | ण्यौ | क | सः |
| पी | ड्य | न्ते | गृ | हि | णः | क | थं | नु | त | न | या | वि | श्ले | ष | दुः | खै | र्न | वैः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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