शुश्रूषस्व गुरून्कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने
भर्तृविप्रकृतापि रोषणतया मा स्म प्रतीपं गमः ।
भूयिष्ठं भव दक्षिणा परिजने भाग्येष्वनुत्सेकिनी
यान्त्येवं गृहिणीपदं युवतयो वामाः कुलस्याधयः ॥
शुश्रूषस्व गुरून्कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने
भर्तृविप्रकृतापि रोषणतया मा स्म प्रतीपं गमः ।
भूयिष्ठं भव दक्षिणा परिजने भाग्येष्वनुत्सेकिनी
यान्त्येवं गृहिणीपदं युवतयो वामाः कुलस्याधयः ॥
भर्तृविप्रकृतापि रोषणतया मा स्म प्रतीपं गमः ।
भूयिष्ठं भव दक्षिणा परिजने भाग्येष्वनुत्सेकिनी
यान्त्येवं गृहिणीपदं युवतयो वामाः कुलस्याधयः ॥
अन्वयः
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गुरून् शुश्रूषस्व। सपत्नीजने प्रियसखीवृत्तिम् कुरु। भर्तुः विप्रकृता अपि रोषणतया प्रतीपम् मा स्म गमः। परिजने भूयिष्ठम् दक्षिणा भव। भाग्येषु अनुत्सेकिनी (भव)। एवम् युवतयः गृहिणीपदम् यान्ति। वामाः कुलस्य आधयः (भवन्ति)।
Summary
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Serve your elders. Treat your co-wives as dear friends. Even if wronged by your husband, do not act contrary out of anger. Be very generous to your attendants. Do not be arrogant in good fortune. In this way, young women attain the status of a true wife; those who act otherwise are a torment to their family.
पदच्छेदः
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| शुश्रूषस्व | शुश्रूषस्व (√श्रु +सन् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | serve |
| गुरून् | गुरु (२.३) | your elders |
| कुरु | कुरु (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | act |
| प्रियसखीवृत्तिम् | प्रिय–सखी–वृत्ति (२.१) | with the conduct of a dear friend |
| सपत्नीजने | सपत्नी–जन (७.१) | towards your co-wives |
| भर्तुः | भर्तृ (५.१) | by your husband |
| विप्रकृता | विप्रकृत (वि+प्र√कृ+क्त, १.१) | wronged |
| अपि | अपि | even if |
| रोषणतया | रोषणता (३.१) | out of anger |
| मा | मा | do not |
| स्म | स्म | (prohibitive particle) |
| प्रतीपम् | प्रतीप (२.१) | contrary |
| गमः | गमः (√गम् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) म.पु. एक.) | go |
| भूयिष्ठम् | भूयिष्ठ (२.१) | very |
| भव | भव (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be |
| दक्षिणा | दक्षिणा (१.१) | generous |
| परिजने | परिजन (७.१) | to your attendants |
| भाग्येषु | भाग्य (७.३) | in good fortune |
| अनुत्सेकिनी | अनुत्सेकिन् (१.१) | not arrogant |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | attain |
| एवम् | एवम् | thus |
| गृहिणीपदम् | गृहिणी–पद (२.१) | the status of a wife |
| युवतयः | युवति (१.३) | young women |
| वामाः | वामा (१.३) | contrary women |
| कुलस्य | कुल (६.१) | of the family |
| आधयः | आधि (१.३) | are torments |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शु | श्रू | ष | स्व | गु | रू | न्कु | रु | प्रि | य | स | खी | वृ | त्तिं | स | प | त्नी | ज | ने |
| भ | र्तृ | वि | प्र | कृ | ता | पि | रो | ष | ण | त | या | मा | स्म | प्र | ती | पं | ग | मः |
| भू | यि | ष्ठं | भ | व | द | क्षि | णा | प | रि | ज | ने | भा | ग्ये | ष्व | नु | त्से | कि | नी |
| या | न्त्ये | वं | गृ | हि | णी | प | दं | यु | व | त | यो | वा | माः | कु | ल | स्या | ध | यः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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