उत्पक्ष्मणोर्नयनयोरुपरुद्धवृत्तिम्
बाष्पं कुरु स्थिरतया विरतानुबन्धम् ।
अस्मिन्नलक्षितनतोन्नतभूमिभागे
मार्गे पदानि खलु ते विषमीभवन्ति ॥
उत्पक्ष्मणोर्नयनयोरुपरुद्धवृत्तिम्
बाष्पं कुरु स्थिरतया विरतानुबन्धम् ।
अस्मिन्नलक्षितनतोन्नतभूमिभागे
मार्गे पदानि खलु ते विषमीभवन्ति ॥
बाष्पं कुरु स्थिरतया विरतानुबन्धम् ।
अस्मिन्नलक्षितनतोन्नतभूमिभागे
मार्गे पदानि खलु ते विषमीभवन्ति ॥
अन्वयः
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स्थिरतया उत्पक्ष्मणोः नयनयोः उपरुद्धवृत्तिम् बाष्पम् विरतानुबन्धम् कुरु। अस्मिन् अलक्षितनतोन्नतभूमिभागे मार्गे ते पदानि खलु विषमीभवन्ति।
Summary
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With firmness, stop the flow of tears that obstruct the view from your upturned eyelashes. On this path, where the ups and downs of the ground are not visible, your steps are indeed becoming unsteady.
पदच्छेदः
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| उत्पक्ष्मणोः | उत्पक्ष्मन् (६.२) | of the upturned eyelashes |
| नयनयोः | नयन (६.२) | of the two eyes |
| उपरुद्धवृत्तिम् | उपरुद्ध (उप√रुध्+क्त)–वृत्ति (२.१) | whose flow is obstructed |
| बाष्पम् | बाष्प (२.१) | the tear |
| कुरु | कुरु (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | make |
| स्थिरतया | स्थिरता (३.१) | with firmness |
| विरतानुबन्धम् | विरत (वि√रम्+क्त)–अनुबन्ध (२.१) | whose continuation is stopped |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | on this |
| अलक्षितनतोन्नतभूमिभागे | अलक्षित–नत–उन्नत–भूमिभाग (७.१) | where the ups and downs of the ground are not visible |
| मार्गे | मार्ग (७.१) | path |
| पदानि | पद (१.३) | steps |
| खलु | खलु | indeed |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| विषमीभवन्ति | विषमीभवन्ति (√विषमीभू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are becoming unsteady |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्प | क्ष्म | णो | र्न | य | न | यो | रु | प | रु | द्ध | वृ | त्ति |
| म्बा | ष्पं | कु | रु | स्थि | र | त | या | वि | र | ता | नु | ब | न्धम् |
| अ | स्मि | न्न | ल | क्षि | त | न | तो | न्न | त | भू | मि | भा | गे |
| मा | र्गे | प | दा | नि | ख | लु | ते | वि | ष | मी | भ | व | न्ति |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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