तस्याः पुष्पमयी शरीरलुलिता शय्या शिलायामियम्
क्लान्तो मन्मथलेख एष नलिनीपत्रे नखैरर्पितः ।
हस्ताद्भ्रष्टमिदं बिसाभरणमित्यासज्यमानेक्षणो
निर्गन्तुं सहसा न वेतसगृहाच्छक्नोमि शून्यादपि ॥
तस्याः पुष्पमयी शरीरलुलिता शय्या शिलायामियम्
क्लान्तो मन्मथलेख एष नलिनीपत्रे नखैरर्पितः ।
हस्ताद्भ्रष्टमिदं बिसाभरणमित्यासज्यमानेक्षणो
निर्गन्तुं सहसा न वेतसगृहाच्छक्नोमि शून्यादपि ॥
क्लान्तो मन्मथलेख एष नलिनीपत्रे नखैरर्पितः ।
हस्ताद्भ्रष्टमिदं बिसाभरणमित्यासज्यमानेक्षणो
निर्गन्तुं सहसा न वेतसगृहाच्छक्नोमि शून्यादपि ॥
अन्वयः
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शिलायाम् इयम् तस्याः शरीरलुलिता पुष्पमयी शय्या। एषः नलिनीपत्रे नखैः अर्पितः क्लान्तः मन्मथलेखः। इदम् हस्तात् भ्रष्टम् बिसाभरणम्। इति आसज्यमानेक्षणः (अहम्) शून्यात् अपि वेतसगृहात् सहसा निर्गन्तुम् न शक्नोमि।
Summary
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"Here on the stone slab is her flower-bed, crushed by her body; this is the faded love letter inscribed with her nails on a lotus leaf; this is the lotus-stalk ornament fallen from her hand." With my eyes fixed on these things, I am unable to leave this cane-bower, even though it is now empty.
पदच्छेदः
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| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| पुष्पमयी | पुष्पमयी (१.१) | made of flowers |
| शरीरलुलिता | शरीर–लुलित (१.१) | crushed by her body |
| शय्या | शय्या (१.१) | bed |
| शिलायाम् | शिला (७.१) | on the stone slab |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| क्लान्तः | क्लान्त (√क्लम्+क्त, १.१) | faded |
| मन्मथलेखः | मन्मथ–लेख (१.१) | love letter |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| नलिनीपत्रे | नलिनी–पत्र (७.१) | on the lotus leaf |
| नखैः | नख (३.३) | with fingernails |
| अर्पितः | अर्पित (√ऋ+णिच्+क्त, १.१) | inscribed |
| हस्तात् | हस्त (५.१) | from her hand |
| भ्रष्टम् | भ्रष्ट (√भ्रंश्+क्त, १.१) | fallen |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| बिसाभरणम् | बिस–आभरण (१.१) | ornament of lotus stalk |
| इति | इति | thus |
| आसज्यमानेक्षणः | आसज्यमान–ईक्षण (१.१) | with my eyes fixed upon |
| निर्गन्तुम् | निर्गन्तुम् (निर्√गम्+तुमुन्) | to leave |
| सहसा | सहसा | suddenly |
| न | न | not |
| वेतसगृहात् | वेतस–गृह (५.१) | from the cane-bower |
| शक्नोमि | शक्नोमि (√शक् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am able |
| शून्यात् | शून्य (५.१) | empty |
| अपि | अपि | even |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्याः | पु | ष्प | म | यी | श | री | र | लु | लि | ता | श | य्या | शि | ला | या | मि | य |
| म्क्ला | न्तो | म | न्म | थ | ले | ख | ए | ष | न | लि | नी | प | त्रे | न | खै | र | र्पि | तः |
| ह | स्ता | द्भ्र | ष्ट | मि | दं | बि | सा | भ | र | ण | मि | त्या | स | ज्य | मा | ने | क्ष | णो |
| नि | र्ग | न्तुं | स | ह | सा | न | वे | त | स | गृ | हा | च्छ | क्नो | मि | शू | न्या | द | पि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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